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दिखावा साबित हो रही पुलिस की तीसरी आंख, खुलेआम हो रहीं बाइक चोरी और अन्य घटनाएं

शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्य चौराहों, बाजारों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

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दमोह. शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्य चौराहों, बाजारों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। दावा किया गया था कि इन कैमरों के माध्यम से अपराध पर नियंत्रण पाया जाएगा और आमजन को सुरक्षित माहौल मिलेगा। इसके लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां से 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है।

लेकिन हकीकत इससे उलट है। शहर में आए दिन चोरी, जेबकट और बदमाशी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिन पर कैमरों की निगरानी कोई असर नहीं दिखा रही। बाजार से बाइक चोरी, राह चलते लोगों की जेब कटने और शराबियों द्वारा सरेआम उपद्रव जैसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कई बार यह वारदातें दिनदहाड़े होती हैं और बदमाश बेखौफ होकर फरार हो जाते हैं।

कैमरे चालू नहीं या फुटेज बेकार

सूत्रों के अनुसार, कई कैमरे लंबे समय से खराब हैं या रिकॉर्डिंग सिस्टम से जुड़े ही नहीं हैं। कई कैमरों पर धूल की मोटी परत जमी है, जिससे फुटेज धुंधले और बेकार हो जाते हैं। ऐसे में कैमरों से निगरानी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।

इधर, आम लोगों का कहना है कि जब इतने कैमरे लगने के बाद भी अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, तो फिर इनका क्या उपयोग है। शहर के हरीश रैकवार, रीतेश, रफीक खान, जयकिशन श्रीवास्तव सहित अन्य का कहना है कि यदि कंट्रोल रूम से निगरानी हो रही है, तो अपराधों की रोकथाम क्यों नहीं हो रही। राजेंद्र तिवारी ने बताया कि तीन माह पहले जिला अस्पताल चौराहा के समीप से उनकी बाइक चोरी हो गई थी। जहां यह घटना हुई वहां कैमरे भी लगे हैं, लेकिन चोर आज तक नहीं पकड़े गए।

बता दें कि स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सिर्फ कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित जांच, समय समय पर मेंटेनेंस और फुटेज की निगरानी जरूरी है। इसके साथ ही, कैमरों की मदद से अपराधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि जनता को भरोसा हो सके कि शहर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।