
बया नर चिडिय़ा
यूसुफ पठान मडिय़ादो. मडिय़ादो बफर एरिया में विभिन्न जीव जंतुओं के लिए स्थाई ठिकाना बना हुआ है। इन पक्षियों में एक बहुत ही अकलमंद पक्षी बया चिडिय़ा भी देखने मिल रही है। इसकी कारीगरी इतनी कमाल की है जिसे हर कोई देखते ही हैरत में रह जाता है। एक-एक तिनके से बनाया गया इसका सुंदर घोसला इसकी कारीगरी को बयान करता है।
बताया जाता है कि भले ही देखने में यह छोटी सी चिडिय़ा है। लेकिन इसकी इंजीनियरिंग कला अच्छे अच्छों को सोचने मजबूर कर देती है। खास बात यह है बया नर चिडिय़ा पहले आधा घोसला बनाती है और इसे मादा को दिखाता है। यदि मादा पक्षी को अधूरा घोंसला पंसद नहीं आया तो वह उसे रिजेक्ट कर देती है और फिर नर दूसरा घोंसला बनाने में जुट जाता है। आधा घोंसला तैयार होने के बाद मादा बया उसे देखती है और पंसद आने पर दोनों उस अधूरे घोसले को पूरा करते हैं।
मादा के रिजेक्ट करने के कारण पेड़ों पर कई घोसले आधे अधूरे रह जाते हंै।
पंसद के घोसलें में मादा तीन से चार अंडे देती है। जिनको विकसित होने में लगभग 20 दिन का समय लगता है। इसके बाद नर मादा दोनों मिलकर दो से तीन माह तक उन बच्चों की देखभाल करते हंै। बच्चे जब उड़ान भरने के लायक हो जाते हंै तब तक बया का यह परिवार घोसला छोड़ कर चले जाते हंै। मूलत: यह ग्रासलैंड का पक्षी है।
घोसला बनाने में सुरक्षा का रखा जाता है ख्याल-
यह पक्षि जितना सुंदर कारीगर है। उतना ही अक्लमंद भी है। इसके घोसला नदी, नालों के किनारे जहां किसी के आसानी से पहुंचना न हो, जंगल में ऊंचे और कटीले वृक्षों की टहनियों, खजूर के वृक्षों आदि पर घोसला बनाया जाता है। जिससे उनके प्रजनन काल से लेकर अंडों के विकसित होने और बच्चों की उड़ान भरने तक के समय में किसी प्रकार से दखलनदाजी नहीं हो।
Published on:
28 Sept 2019 12:00 am
बड़ी खबरें
View Allदमोह
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
