
Water could not be filled in Satdharu dam as expected
दमोह. दमोह जिले की महत्वकांक्षी जल प्रदाय योजना सतधरू परियोजना से जबेरा, तेंदूखेड़ा, पटेरा व दमोह ब्लॉक सहित 647 गांवों में पानी पहुंचाने की योजना से इस साल कुछ ही हिस्सों को पानी मिल पाएगा। जिसका कारण है सतधरू बांध का भराव जिस स्तर पर होना था, उतना जलभराव इस बांध में नहीं हो पाया है। जिससे सर्वाधिक जलसंकट वाले तेंदूखेड़ा और जबेरा में इस साल भी इस परियोजना से पानी नहीं मिल पाएगा।
दमोह ब्लॉक के अधरोटा गांव के पास हरदुआ हटरी में पहाडियों के बीच सतधरू मध्यम परियोजना पर कार्य चल रहा है। 315 करोड़ की लागत से 647 गांवों में घर.घर पानी पहुंचाया जाना है। सतधरु परियोजना पर जून 2018 में कार्य शुरू किया गया था। यह कार्य जल निगम व जलसंसाधन को संयुक्त रूप से करना है। जल निगम द्वारा फिल्टर प्लांट, इंटकवेल व टंकियां बनाने का काम जारी है। कुल 240 टंकियां बननी हैं, जिनमें से 100 टंकियां बनाई जा चुकी हैं।
6 मिलियन घनमीटर ही भर पाया पानी
जलसंसाधन विभाग द्वारा सतधरू पर बांध का निर्माण किया गया है। बांध का जल ग्रहण क्षेत्र 144 वर्ग किमी बांध की लंबाई 750 मीटर और 24.98 मीटर ऊंचाई प्रस्तावित है। इसके अलावा तट नहर की लंबाई 30 किमी और दांयी तट नहर की लंबाई 5 किमी प्रस्तावित की गई। इसके साथ ही माइनरों की लंबाई 15 किलोमीटर है। बांध में 63 मिलियन घन मीटर पानी भराव का आंकलन किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में 6 मिलियन घनमीटर ही भर पाया है, अल्प बारिश का असर सतधरू बांध पर भी दिख रहा है।
ये ब्लॉक होंगे लाभान्वित
इस परियोजना के तहत जबेरा व तेंदूखेड़ा ब्लॉक के सभी गांव लाभान्वित होंगे। इसके अलावा दमोह ब्लॉक के 153 गांवए पटेरा ब्लॉक के 103 गांव व हटा ब्लॉक के 48 गांव शामिल किए गए हैं। जहां सतधरू बांध से पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाना है। पाइप लाइन बिछाने का काम दु्रत गति से चल रहा है। कुछ गांवों में घर-घर पाइप लाइन बिछाने का काम भी शुरू हो गया है। यह कार्य पटेरा ब्लॉक में चल रहा है। पंपिंग मैन लाइन व ग्रेविटी मैन लाइन 1470 किमी बिछाई जानी है। इसके अलावा 2190 किमी पाइप लाइन बिछाई जाना हैए जिसके लिए पाइप भी यहां वहां डंप कर खुदाई कार्य चल रहा है।
कोरोना और बजट से पिछड़ा काम
सतधरू परियोजना के कार्य कांग्रेस के कार्यकाल में मंथर गति पर आ गए थे। स्वीकृत बजट न मिल पाने के कारण काम की धीमी रफ्तार हो गई थी। इसके बाद कोरोना काल में काम रुक गया था। परियोजना के मजदूर काम छोड़कर अपने घरों को चले गए थे, इससे भी कार्य प्रभावित हुआ है। अब पानी मिलने के लिए दिसंबर माह से टेस्टिंग शुरू होना है तो बांध का भराव कम हुआ है, जिससे भी लोगों को इस साल भी पेयजल परियोजना का काम नहीं मिल पाएगा।
Published on:
09 Nov 2021 09:21 pm
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