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दुनिया के सबसे ऊंचे जैन मंदिर का लोकार्पण- इसके निर्माण में नहीं हुआ लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग

आश्चर्य की बात तो यह है कि इस मंदिर के निर्माण में लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया है.

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दुनिया के सबसे ऊंचे जैन मंदिर का लोकार्पण- इसके निर्माण में नहीं हुआ लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग

दुनिया के सबसे ऊंचे जैन मंदिर का लोकार्पण- इसके निर्माण में नहीं हुआ लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग

दमोह. मध्यप्रदेश के दमोह जिले में दुनिया का सबसे बड़ा जैन मंदिर का निर्माण हुआ है, कुंडलपुर स्थित बड़े बाबा के इस भव्य मंदिर का लोकार्पण इसी माह किया जा रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस मंदिर के निर्माण में लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि इसका निर्माण गुजरात व राजस्थान के लाल-पीले पत्थरों से किया गया है।

12 फरवरी से शुरू होगा पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव

जैन तीर्थ कुंडलपुर में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव 12 फरवरी से शुरू होगा। वसंत पंचमी पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों से चर्चा के बाद यह घोषणा की। दुनिया के सबसे ऊंचे जैन मंदिर के इस लोकार्पण समारोह और पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में आचार्यश्री के संघस्थ ढाई सौ से अधिक मुनि और आर्यिकाओं का सान्निध्य मिलेगा।

20 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे
इस आयोजन में देशभर से 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 200 से अधिक मुनि संघ कुंडलपुर में पहले से मौजूद हैं, कुछ मुनि संघों का कुंडलपुर की ओर विहार जारी है।

कुंडलपुर कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई ने बताया कि पहले यह आयोजन 5 फरवरी से होना था, लेकिन कोरोना केस बढऩे के चलते इसे टाल दिया गया था।


मुनि सेवा समिति के मुकेश जैन ने बताया, 5 दिसंबर को आचार्यश्री का कुंडलपुर में प्रवेश हुआ। उसके बाद निर्यापक मुनि समयसागर, निर्यापक मुनि योगसागर, मुनि प्रशांतसागर, मुनि विमलसागर, अजितसागर, सौम्यसागर सहित कई अन्य संघ कुंडलपुर पहुंच चुके हैं। जिले के इसरवारा में जन्मे चतुर्थ निर्यापक मुनि सुधासागर भी 8 वर्ष बाद कुंडलपुर पहुंच रहे हैं।

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दमोह जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर स्थित कुंडलपुर में बड़े बाबा के मंदिर निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसके शिखर की ऊंचाई 189 फीट है। दुनिया में अब तक नागर शैली में इतनी ऊंचाई वाला मंदिर नहीं है। मंदिर की खासियत यह है कि इसमें लोहा, सरिया, सीमेंट का उपयोग नहीं किया है। इसे गुजरात व राजस्थान के लाल-पीले पत्थरों से तराशा गया है।