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अगस्त क्रांति होगी तो सिर्फ तिरंगे के नीचे : सोनी सोरी

आधा दर्जन से अधिक मंच के लोगों की रायपुर में हुई बैठक, अपने-अपने झंडों की जिद ने, कहा दर्द बस्तर का है राजनीति नहीं चाहिए, इस कार्यक्रम में कोई भी आए पर तिरंगा हाथ में लेना होगा

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Ajay Shrivastava

Jul 24, 2016

Pain dwellers

No political interference

दंतेवाड़ा.
ज्यों-ज्यों अगस्त क्रांति का समय नजदीक आ रहा है तमाम मंचों की बैठक का दौर शुरू हो गया है और राजनीति भी पैर पसार रही है। वामपंथी मंच से लेकर छोटे-मोटे संगठन गोमपाड़ हिड़मे मामले को भुनाने चाहते हैं।


इन लोगों का बस्तर के दर्द से सरोकार नहीं हैं। हाल ही में हुई बैठक में तिरंगे को लेकर ऊहापोह की स्थिति रही। आधा दर्जन से अधिक मंच इस बैठक में शामिल हुए। इन मंच के पदाधिकारियों का कहना था कि अपने झंडे के साथ गोमपाड़ जाएंगे। समाज सेवी सोनी सोढ़ी ने दो टूक शब्दों में कहा दर्द बस्तर का है राजनीतिक हस्ताक्षेप नहीं होने देंगे।


बस्तवासियों के दर्द में शामिल का आह्वान है पार्टियों के झंडे नहीं चाहिए। अगस्त क्रांति में शामिल होना है तो सर्वसमाज के बैनर तले आओ, ये लड़ाई बस्तर की है। उन बेचारों की तस्वीरों को आगे रखा जाएगा जिनके लिए इस सत्याग्रह का ऐलान किया गया है। हिड़मे की तस्वीर होगी, हुर्रे का बेटा, पेद्दागेलूर में फोर्स के अनाचार की कहानी सामने होगी।


किसी मंच का झंडा नहीं। तिरंगा पर कोई समझौता नहीं होगा। तिरंगा गोमपाड़ में लहराएगा, वहां के लोगों को सुना जाएगा। ये वक्त है उन लोगों के सुनने का। उन अंदरूनी क्षेत्र के आदिवासियों की आवाज बाहर लाने का। ये वो लोग है रह रहे देश में, लेकिन उनके पास कोई प्रमाण भी नहीं है कि देश के वासी है।


अपना-अपना राग अलाप

सोनी सोरी का भतीजा बताता है कि सीपीआईएम, सीपीआई रेड स्टार, सीपीआई एमएल आदिवासी सर्व समाज, डब्ल्यूएसएस और आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, पीयूसीएल इन सभी के पदाधिकारी इस बैठक में शामिल हुए थे। सभी की अपनी-अपनी ढपली और अपना राग था। इस बैठक में तिरंगे को लेकर सहमति नहीं बन पाई। हर मंच अपने सिंबल लेकर गोमपाड़ जाना चाहता है। यही वजह थी सोरी ने इनकार कर दिया और वहां स्पष्ट शब्दों में कहा तिरंगे के नीचे ही सत्याग्रह होगा।


26 जुलाई को एक और बैठक, रूट भी होगा तय

दो दिन बाद एक और बैठक होने की बात कही जा रही है। दंतेवाड़ा से जिस अगस्त क्रांति का आगाज होना है मांई के दरबार में दस्तक देने के बाद देश का तिरंगा और अत्याचार की कहानियों के छायचित्र लोगों के हाथों में होंगे। 26 जुलाई को होने वाली बैठक में इस बात को रखा जाएगा। उसी दिन रूट तय होगा। गोमपाड़ जाने के लिए अभी रूट में असमंजस बना हुआ है।


बस्तरवासी भी बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में सर्व समाज की बात को ही रखा गया है। सोनी ने फिर कहा ये लड़ाई बस्तर के दर्द की है, बस्तर में कैसे लोग मर रहे है, गरीबी है, भुखमरी है, बंदूक से निकली गोली सीना चीर रही है, वो भी भूखे पेट। उस गोमपाड़ में सरकार के दावे फेल है। किसी के पास राशन कार्ड नहीं है। सरकार का चावल का दावा भी झूठा है।