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सोनी सोढ़ी ने कहा मैं अगवा सहायक आरक्षक को लाउंगी वापस

सुकमा के अगवा सहायक आरक्षक कलमू हिरमा को नक्सलियों के चंगुल से छुड़ाने आप नेत्री सोनी सोरी सामने आई है। सोरी ने कहा, कलमू सुरक्षित है।

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Ajay Shrivastava

Nov 04, 2016

soni sori

soni sori

दंतेवाड़ा.
तीन दिन पहले सुकमा के दोरनापाल जंगल से माओवादियों ने सहायक आरक्षक कलमू हिरमा को अगवा कर लिया है। तीन दिन बाद भी उसकी कोई खोज खबर पुलिस नहीं कर पाई और न ही सरकार ने कोई पहल किया। ऐसे में परिजनों की दयनीय हालत देखते सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी इस अगवा आरक्षक को बचाने आगे आई हैं।


दंतेवाड़ा मे दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन करने के बाद सोनी व आप पार्टी के दस सदस्य सहायक आरक्षक कलमू को ढूंढने जंगल की ओर निकल गए हैं। सोनी सोढ़ी ने बताया कि मां दंतेश्वरी से उसकी व उसके परिवार की सलामती के लिए दुआ मांगी है इसके साथ ही अपने बचाव अभियान की सफलता के लिए भी इश्वर से प्रार्थना की हूं। सोनी ने कहा कि ग्रामीणों से सूचना मिली है कि कलमू अभी तक सुरक्षित है।


सोनी के साथ सुकुलधर नाग, अरविंद गुप्ता, त्रिपति भी अगवा जवान की तलाश में रवाना हुए हैं। ज्ञात हो कि सुकमा जिले के पुसबाडा कैंप में तैनात सहायक कलमू हिड़्मा की माओवादियों ने सोमवार को अगवा कर लिया था। तीन दिन बाद भी उसकी रिहाई के लिए पुलिस प्रशासन से पहल नहीं किया तो आप पार्टी के कार्यकर्ता जवान को सुरक्षित लाने जंगल की ओर जाने का निर्णय लिया है।


कांकेरलंका के जंगल की छानेंगे खाक

यह टीम सहायक आरक्षक के परिवार से मिलने के बाद कांकेरलंका के जंगल में प्रवेश करेंगे। सोनी सोरी बताती हैं कि जवान को माओवादियों ने इसी इलाके में रखा हुआ है। गांव वालों के साथ इस जंगल की खाक छानी जाएगी। पूरा प्रयास रहेगा कि जवान को सुरक्षित घर लाया जाए। सोनी सोरी ने पुलिस और राज्य सरकार पर आरोप लगाते कहा कि जवान की रिहाई के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने अब तक कोई पहल नहीं किया है।


शोषित हो रहा है आदिवासी

सोनी सोरी कहती हैं कि सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में चौतरफा मार सिर्फ आदिवासी ही झेल रहा है। यही किसी वरिष्ठ अधिकारी का माओवादी अपहरण करते तो पूरा सिस्टम उसका छुड़ाने के लिए पसीना बहता नजर आता। इस जवान के अगवा होने के तीन दिन बाद भी न तो सरकार जागी और न ही पुलिस प्रशासन। इस बात से साफ पता चलता है कि न तो सरकार हितैषी है और न ही माओवादी। यदि माओवादी आदिवासियों के हित का ढिढौंरा पिटते तो कलमू हिरमा को अगवा नहीं करते।

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