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जिस गांव के जंगल में दिया जुड़वा बच्चों को जन्म,गांव प्रमुख ने सुनाया देशीमुर्गा और शराब की पार्टी का फरमान

मिडिय़ापारा के जंगल में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। जंगल में बच्चा होने से गांव की महिलाओं ने जच्चा-बच्चा का जीवन बचाने दो घंटे तक प्रयास किया।

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देशीमुर्गा और शराब की पार्टी का फरमान

दंतेवाड़ा . सुकमा जिले के परलकट्टा की रहने वाली मासे ने किरंदुल के समीप मीडिय़ापारा के जंगल में इमली पेड़ के नीचे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। गंभीर अवस्थ में मिडिय़ापारा की महिलाओं ने जच्चा-बच्चा की जान बचाई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। अब जबकि दोनों बच्चे स्वस्थ है। मिडिय़ापारा के ग्रामीणों ने बैठक कर परिजन को दावत देने का फरमान सुनाया है। इसमें दो देशी मुर्गा, पांच बोतल शराब की मांग की है।

दो देशी मुर्गा व पांच बोतल शराब का प्रबंध
गांव के प्रमुख का कहना है कि मेरी माटी में स्वस्थ व जुड़वा बच्चों ने जन्म दिया है। इसलिए दो देशी मुर्गा व पांच बोतल शराब का प्रबंध परिजन को करना होगा। इस खुशी के मौके पर पिता भी गांव वालों के फरमान को नकार नहीं सका और उसने भी हां कर दी है। कमलू का कहना है जैसे ही वह अस्पताल से छुट्टी लेगा। आदिवासी परंपरा के अनुसार गांव के लोगों के लिए दावत का इंतजाम करेगा।

गांव की महिलाओं ने जीवन बचाने दो घंटे तक प्रयास
मालूम हो परलाकट्टा गांव के कमलू की गर्भवती पत्नी मासे ने मिडिय़ापारा के जंगल में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। जंगल में बच्चा होने से गांव की महिलाओं ने जच्चा-बच्चा का जीवन बचाने दो घंटे तक प्रयास किया। दोनों बच्चों के स्वस्थ प्रसव के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया। तीन दिन बाद ग्रामीणों को इसका पता चला कि मां बच्चे स्वस्थ हैं तो दावत के लिए इंतजाम करने का फरमान सुनाया है

ये था मामला था मामला
किरंदुल स्थित एनएमडीसी परियोजना हॉस्पिटल में शुक्रवार को लापरवाही नजर आई थी। किरंदुल से करीब 35 किमी दूर आयरनहिल से सटे सुकमा जिले के परलाकट्टा गांव के कमलू ने अपनी गर्भवती पत्नी मासे को हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। एक सितंबर से भर्ती कोसी का सप्ताह भर बाद भी प्रसव नहीं हुआ तो संबंधित डॉक्टर ने 8 सितंबर को उसे डिस्चार्ज कर दिया। कमलू की माने तो डॉक्टर ने कहा 15 दिन बाद आना अभी प्रसव का समय नहीं हुआ है। परिजनों के साथ घर लौटती महिला को रास्ते में प्रसव पीड़ा होने लगी। आखिरकार किरन्दुल के पास मिडिय़ापारा गांव के जंगल में उसे असहनीय दर्द शुरू हो गया। यहां इमली पेड़ के नीचे उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। गांव के लोगों ने उसकी मदद की।