
गांव में दोनों पक्ष के बीच होती बहस (फोटो-स्क्रीन ग्रैब )
Bihar News: बिहार के दरभंगा में कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में दर्ज एक FIR आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण यह है कि इस एक ही FIR में पूरे गांव के ब्राह्मण समुदाय के सभी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग सालों से अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में काम कर रहे हैं, फिर भी उनके नाम भी आरोपियों की लिस्ट में शामिल हैं।
दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाने में दर्ज इस FIR में हरिनगर गांव के करीब 70 ब्राह्मणों के नाम हैं, जबकि 100 से 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता, असरफी पासवान का आरोप है कि पूरे गांव ने मिलकर उनके परिवार पर हमला किया और उन्हें परेशान किया। इसी आधार पर पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जैसे ही यह मामला सामने आया, गांव में हंगामा मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार है कि किसी विवाद में पूरे समुदाय को आरोपी बनाया गया है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि FIR में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें से कई सालों से गांव में नहीं रह रहे हैं। कुछ दिल्ली और मुंबई में मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करते हैं। परिवार वालों का कहना है कि घटना के समय ये लोग गांव में मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया है।
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (NCIB) ने भी इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया है। NCIB ने लिखा, “बिहार के दरभंगा जिला में दर्ज इस अनोखी FIR में लिखे नामों को देखिए। पूरे गांव में कोई भी ब्राह्मण नहीं छूटा, सब पर SC/ ST ACT मे FIR हो गई, आरोप है कि पूरे गांव ने मिलकर सामूहिक शोषण किया।"
NCIB के पोस्ट में आगे लिखा गया, "एक FIR में जिला के हरिनगर गांव के सभी ब्राह्मण शोषणकर्ता, अताताई बना दिए, सब पर SC/ ST ऐक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर दिया गया। FIR में नामजद अधिकतर ब्राह्मण दिल्ली मुंबई में मजदूरी और अपने परिवार का पेट पालन हेतु नौकरी कर रहे हैं।"
पुलिस और शिकायत के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ एक वित्तीय लेन-देन में है। आरोप है कि विक्रम पासवान के बड़े भाई कैलाश पासवान ने 2015 में हरिनगर गांव के रहने वाले हेमंत झा के लिए एक घर बनाया था। निर्माण कार्य के लिए लगभग ढाई लाख रुपये अभी भी बकाया बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि बार-बार मांगने पर भी पेमेंट नहीं किया गया। यह दुश्मनी 31 जनवरी, 2026 की रात को हिंसा में बदल गई। लाठियों और दूसरे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, और स्थिति जल्दी ही मारपीट में बदल गई।
शिकायत में आरोप है कि हेमंत झा और कई अन्य लोगों ने मिलकर पासवान परिवार के घर में घुसकर उन पर हमला किया। घर में मौजूद महिलाएं और एक बच्चा भी हमले में घायल हो गए। इस घटना में 10 से ज्यादा लोग घायल हुए। पुलिस ने अब तक 12 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
जब मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं तो विवाद और बढ़ गया। एक पक्ष इसे सामाजिक उत्पीड़न का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि एक आर्थिक विवाद को कानून का गलत इस्तेमाल करने के लिए जातिगत रंग दिया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि अगर कोई दोषी है, तो व्यक्तिगत जांच की जानी चाहिए, और पूरे गांव या समुदाय को सामूहिक रूप से आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।
मामला तब और बढ़ गया जब एक स्थानीय व्यापारी ने SSP से शिकायत की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। इसके बाद पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। हालांकि पुलिस का कहना है कि स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में है। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
बिरौल के DSP प्रभाकर तिवारी ने कहा कि यह घटना मुख्य रूप से पुराने लेन-देन को लेकर हुए विवाद से जुड़ी है। उन्होंने कहा, "पुराने विवाद के कारण कहा-सुनी हुई। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्थिति नियंत्रण में है।"
Updated on:
04 Feb 2026 04:50 pm
Published on:
04 Feb 2026 04:50 pm
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