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पार्षद प्रत्याशी का पति और पूर्व पार्षद शराब और गांजे के साथ पकड़ाया, जखीरा देखकर पुलिस भी हैरान

-शराब और गांजे के जखीरे के साथ पकड़ाया पूर्व पार्षद-निर्दलीय चुनाव लड़ रही है पूर्व पार्षद की पत्नी-मतदाताओं का लालच देने के लिए लाया गया था जखीरा-मुखबिर की सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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पार्षद प्रत्याशी का पति और पूर्व पार्षद शराब और गांजे के साथ पकड़ाया, जखीरा देखकर पुलिस भी हैरान

दतिया. मध्य प्रदेश के दतिया जिले के सिविल लाइन थाना पुलिस ने निकाय चुनाव मतदान के पहले चरण के अंतिम दौर में अवैध शराब, गांजे के जखीरे के साथ और कट्टा- कारतूस का के साथ पूर्व पार्षद लक्ष्मण यादव को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी सिविल लाइन धवल सिंह चौहान ने बताया कि, पूर्व ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए ये सामान रखा हुआ था।

आपको बता दें कि, पूर्व पार्षद की पत्नी नीलम यादव वार्ड क्रमांक 31 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में डटी हैं। पूर्व पार्षद को उक्त सामान के साथ उसके घर से मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पूर्व पार्षद के खिलाफ तीन अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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ऊंट किस करवट बैठेगा, देखना रोचक होगा

वहीं, बात करें जिले के चुनावी गणित की तो फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि, ऊंट किस करवट बैठेगा। नगरीय निकाय के चुनाव में इस बार एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। इधर, निर्दलीय प्रत्याशी भी पूरे दमखम के साथ चुनावी रण में उतरे हैं। उल्लेखनीय है कि दतिया में 36 वार्डों में पार्षद पद का मददान 6 जुलाई को होना है। जिला पंचायत के चुनाव के बाद आए रुझानों के आधार पर दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।


मतदाता सभी को दे रहे हैं वोट का आश्वासन

पार्षद के चुनाव में इस बार पूर्व पार्षदों और ऐसे लोगों ने टिकट के लिए दावेदारी जताई थी जो वार्ड में लगातार सक्रिय रहकर अपने आकाओं से टिकट के लिए गुहार लगा रहे थे तो कई जोड़-तोड़ में लगे थे, लेकिन जब दोनों ही पार्टियों ने पार्षद पद के अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा की तो कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। असंतोष का लावा ऐसा फूटा कि वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में कूद पड़े। नाम वापसी के अंतिम दिन भी कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए और नाम वापस नहीं लिया। वार्ड में स्थिति ये है कि, एक ही पार्टी के दो प्रत्याशी आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मतदाता भी चतुराई से काम ले रहे हैं और सभी को वोट देने का आश्वासन दे रहे हैं, क्योंकि आम मतदाता किसी भी स्थानीय प्रत्याशी को नाराज नहीं करना चाहता। ऐसी स्थिति में प्रत्याशी भी ये नहीं जान पा रहे कि, उन्हें कितने वोट मिलेंगे।