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Kaal bhairav jayanti 2018 : MP में यहां चारों दिशाओं पर नजर आते है भैरव,ऐसी है इनकी महिमा

Kaal bhairav jayanti 2018 : MP में यहां चारों दिशाओं पर नजर आते है भैरव,ऐसी है इनकी महिमा

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दतिया

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monu sahu

Nov 30, 2018

Kaal bhairav jayanti 2018

kaal bhairav

संजय तिवारी @ दतिया। भैरव जयंती शुक्रवार को धूमधाम के साथ देशभर में मनाई गई। लेकिन दतिया शहर में भैरव जयंती का विशेष महत्व है। शहर में भगवान भैरव को नगर कोतवाल के रूप में मान्यता प्राप्त है। गौरतलब है कि रियासत काल से ही शहर के प्रमुख प्रवेश स्थलों पर भैरव जी के मंदिर स्थित हैं। यह भैरव मंदिर चूनगर फाटक, राजगढ़ फाटक, रिछरा फाटक, भदौरिया की खिडक़ी बाहर, पंचम कवि की टोरिया पर हैं। इस बजह से दतिया में भैरव जी को कोतवाल कहा जाता है।

चारों दिशाओं पर नजर
शहर में स्थापित भैरव प्रतिमाओं के मुख चारों दिशाओं की ओर हैं। उदाहरण के तौर पर चूनगर फाटक पर स्थित प्रतिमा पूर्व, राजगढ़ फाटक की प्रतिमा पश्चिम, पंचम कवि की टोरिया की प्रतिमा उत्तर एवं भदौरिया की खिडक़ी बाहर स्थित भैरव प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। साहित्यकार विनोद मिश्रा के अनुसार शहर में स्थापित भैरव प्रतिमाओं का मुख चारों दिशाओं में होने की वजह से ही भगवान भैरव को दतिया शहर का कोतवाल माना जाता है।

यह है भैरव अष्टमी का इतिहास
पंडित शैलेंद्र मुडिय़ा बताते हैं कि शिवपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शंकर के अंश भैरव की उत्पत्ति हुई थी। इस तिथि को भैरव अष्टमी के नाम से जाना जाता है। तंत्र - मंत्र साधना के लिए काल भैरव अष्टमी उत्तम तिथि मानी जाती है।

लोक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठ को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी लोग भगवान शंकर के पास आए। सभी देवताओं और ऋषि, मुनियों ने ब्रह्मा और विष्णु को श्रेष्ठ न मान कर सर्वसम्मति से शिव को श्रेष्ठ मान लिया। यह बात ब्रह्मा जी को उचित नहीं लगी और उन्होने अहंकार में शिव को अपशब्द कहे। ब्रह्मा जी के अहंकार का नाश करने के लिए भगवान शंकर क्रोधित हुए। उनके क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ।

भैरव अष्टमी पर विशाल भंडारा
सिद्ध पंचम कवि की टोरिया पर भैरव जयंती हर साल की तरह इस साल भी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर कबिजू की परिवार की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया,जिसमें हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। कार्यक्रम संयोजक विजय कबिजू ने बताया कि भैरव जयंती के उपलक्ष्य में ३० नवंबर की रात में विधि विधान के साथ अभिषेक किया गया। अभिषेक के पश्चात एक दिसंबर को सुबह आठ बजे जन्म आरती होगी। इसके बाद भंडारा लगाया जाएगा।