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देवराज इंद्र का किया अहंकार चूर, श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

कथा वाचक ने श्रोताओं को गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया  

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देवराज इंद्र का किया अहंकार चूर, श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

देवराज इंद्र का किया अहंकार चूर, श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

देवराज इंद्र का किया अहंकार चूर, श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

उनाव। भांडेर अनुभाग के ग्राम पट्टी ततारपुर में माता मंदिर पर सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा वाचक निशा दीदी ने श्रोताओं को गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने बताया कि जब बृजवासी भगवान इंद्र की पूजा करने की तैयारी कर रहे थे तब श्रीकृष्ण भगवान ने उन्हें रोका और इन्द्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा। क्योंकि यह पर्वत उनके पशुओं का भरण पोषण करता था। इसके बाद लोगों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू की। तो अपना अपमान होता देख इंद्र भगवान कुपित हो गए और उन्होंने क्रोध से वशीभूत होकर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान श्रीकृष्ण को कोसने लगे कि सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया। इसके बाद सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछड़े समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इंद्र भगवान, श्रीकृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हो गए। और वर्षा और तेज हो गई। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्रीकृष्ण भगवान ने सुदर्शन चक्र से वर्षा की गति को नियंत्रित किया और शेषनाग से मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोका। सात दिनों तक घटित इस घटनाक्रम के बाद इंद्र भगवान को अपनी गलती का अहसास हुआ। इसके बाद बारिश बंद हो गई। और गोवर्धन पूजा का प्रचलन शुरू हुआ। कथा विश्राम होने पर गोवर से निर्मित गोवर्धन की पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरण किया गया।