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गजब! सरकारी स्कूलों में खिलाड़ी तैयार करने का बजट मात्र सवा रुपए

90 हजार रुपए सालाना खेल बजट, खेल सामग्री के 15 हजार रुपए, जिले में 1100 विद्यालय हैं संचालित

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दौसा. सरकार की ओर से भले ही खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने का ढिंढोरा पीटा जा रहा हो, लेकिन प्राथमिक स्तर पर जिले के विद्यार्थियों पर मात्र सवा रुपए प्रतिवर्ष खेल के नाम पर खर्च किए जा रहे हंै। ऐसे में बजट की कमी से अच्छे खेल आयोजन नहीं हो पा रहे। नन्ही उम्र में ही खेल प्रतिभाएं निखरने से पहले ही मुरझाती नजर आ रही है।


जानकारी के अनुसार प्रारम्भिक शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 के लिए जिले के 1100 सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 70 हजार 860 विद्यार्थियों को खेलने के पेटे 90 हजार रुपए ही मिले हैं। इसके अलावा खेल सामग्री क्रय करने के लिए 15 हजार रुपए आए हैं, जबकि यहां तीन चरणों में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में करीब एक हजार खिलाड़ी भाग लेते हैं।

इसके बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी जिले से करीब 200 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इतनी सी राशि में तीन-चार बार प्रतियोगिता आयोजित कराना तथा छात्रों का डेली अलाउंस (डीए) भुगतान आदि की व्यवस्था करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इसके चलते करीब 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों को अभी भी डीए का भुगतान नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से 60 हजार रुपए की अतिरिक्त मांग भी की गई है, लेकिन अभी तक स्वीकृति प्रदान नहीं हुई है।


ये खेल होते हंै
यहां वॉलीबाल, कुश्ती, बैडमिंटन, जूडो, सॉफ्टबाल, कबड्डी, खो-खो, टेबलटेनिस, जिम्नास्टिक, तैराकी, हॉकी, फुटबाल, हैण्डबाल, बास्केटबाल, लॉनटेनिस, क्रिकेट एवं एथलेटिक्स गेम होते हैं।
भोजन के 50 रुपए रोजाना
खेलने वाले बालकों को पौष्टिक आहार की विशेष आवश्यकता होती है, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को 50 रूपए रोजाना ही मिलते हैं। इससे दो समय की चाय, नाश्ता एवं भोजन करना मुश्किल है।


समकक्ष, फिर भी अलग डीए
माध्यमिक शिक्षा के अधीन आने वाले विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा आठवीं तक के बालकों को सौ रुपए प्रतिदिन डीए देय है, लेकिन प्रारम्भिक शिक्षा के बालकों को 50 रुपए ही मिलते हैं।


नि:शुल्क शिक्षा से बढ़ी मुश्किल
सरकार की ओर से वर्ष 2008 से आठवीं तक की शिक्षा नि:शुल्क कर दी गई है। शुल्क नहीं होने से स्कूल के विकास शुल्क में भी फण्ड नहीं रहता। इससे खेल आयोजन केवल मात्र औपचारिकता बनकर रह गए हंै।


कैसे हो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता
राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता आयोजित कराने के लिए निदेशालय से केवल 15 हजार रुपए ही मिलते हंै। इस राशि से 33 जिलों की छात्र एवं छात्रा वर्ग की टीमों के लिए चार दिनों तक आवास, टेण्ट, माइक, स्टेशनरी, प्रमाण-पत्र सहित अन्य व्यवस्था नहीं हो पाती।


यूनिफॉर्म की बात ही बेमानी
विभाग की ओर से छात्र खिलाड़ी की यूनिफॉर्म के लिए 300 रुपए निर्धारित कर रखे हैं, लेकिन इसके लिए अलग से बजट नहीं है। ऐसे में छात्रों को दूसरे खिलाडिय़ों की पुरानी यूनिफॉर्म पहनकर ही खेलना पड़ता है।


भामाशाह के भरोसे
सरकारी विद्यालयों में खेल प्रतियोगिताएं भामाशाहों के भरोसे ही संचालित होती है। इसके अलावा कार्मिकों को जेब ढीली करनी पड़ती या समाजसेवियों को सहारा लेना पड़ता है।

फैक्ट फाइल
प्रा. एवं उ.प्रा.विद्यालय-1100
कुल विद्यार्थी-70860
खेल आयोजन बजट-90000
खेल सामग्री बजट-15000
प्रतिछात्र रोजाना डीए-50

सफल आयोजन का करते हैं प्रयास


शिक्षा विभाग की ओर से विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए ही बजट आता है। इसके अलावा खेल के लिए अन्य बजट नहीं आता है। ऐसे में जनसहयोग से आयोजन को सफल बनाने का प्रयास करते हैं।
सुरेशचन्द्र जैन, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा, दौसा