
नांगल राजावतान के नेशनल हाइवे के समीप खेती की भूमि पर चल रहा निर्माण कार्य।
दौसा. नांगल राजावतान उपखण्ड मुख्यालय सहित क्षेत्र में सरकारी अमले की उदासीनता के चलते खेती की भूमि पर लोग धड़ल्ले से आवास सहित व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्माण कर रहे हैं। इसके चलते सरकारी खजाने की आय बढऩा तो दूर की बात सरकारी खजाने में चपत लगती नजर आ रही है। नियमानुसार बिना भू परिवर्तन के भूमि को अन्य उपयोग में नहीं लिया जा सकता है। पिछले दो साल का रिकार्ड उठाकर देखें तो मात्र पांच भूखण्डों का कृषि भूमि से आवासीय सहित व्यावसायिक भूमि परिवर्तन हुआ है। इससे सरकारी अमला भू परिवर्तन को लेकर कितना सजक है। इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
उपखण्ड क्षेत्र में दर्जनों स्थानों पर खेती की भूमि पर लोग निर्माण कर आवास सहित व्यवसायिक, वाणिज्य व औद्योगिक उपयोग करने लिए निर्माण कर रहे है। इससे सरकार को राजस्व चपत लगने के साथ ही करकारी नियमों की अवहेलना हो रही है।
दर्जनों जगहों पर चल रहे निर्माण कार्य की ओर राजस्व कर्मियों सहित अधिकारियों ने आंख बंद कर रखी है। इससे निर्माणकर्ताओं द्वारा सरकारी खजाने को हजारों की चपत लगाई जा रही है। निर्माण कार्य को कोई रोकने की जरूरत नहीं समझने से सरकारी खजाने की आय घटती नजर आ रही है। नेशनल हाइवे 11 ए के समीप ही दर्जनों निर्माण कार्य मे चल रहे हंै, लेकिन इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
सरकारी आकड़ों के अनुसार क्षेत्र में मार्च वर्ष 2020 से मार्च 2021 तक में एक आवासीय, 3 औद्योगिक व एक वाणिज्य उपयोग के लिए भूखण्डों का भू परिवर्तन हुआ है। इसके बाद अप्रल 2021 से 10 दिसम्बर 2021 तक एक भी भू खण्ड का भू परिवर्तन नहीं हुआ है। जबकि वर्तमान में दर्जनों जगहों पर निर्माण कार्य चल रहे हंै।
यह है भू परिवर्तन के नियम....
जानकारी के अनुसार कृषि भूमि पर आवास व व्यावसायिक उपयोग के लिए काम लेने पर पहले तहसीलदार या उपखण्ड अधिकारी द्वारा खेती की भूमि का भू परिवर्तन किया जाता है। भू परिवर्तन करने पर क्षेत्र की डीएलसी दर का करीब पांच से दस प्रतिशत या पांच से सात रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भू परिवर्तन चार्ज लिया जाता है। यह शुल्क राशि सरकारी खजाने में जमा होती है। इसके बाद ही खेती की भूमि को तहसीलदार या उपखण्ड अधिकारी आवास, औद्योगिक या वाणिज्य उपयोग के लिए भू परिवर्तन करते हैं। बिना भू परिवर्तन के खेती की भूमि को अन्य उपयोग में लेना गैर कानूनी है।
तीन गुना लगेगी राशि ...
खेती की भूमि पर बिना भू परिवर्तन के अन्य उपयोग के लिए निर्माण करवाने के बाद यदि भूमि मालिक द्वारा उसका भू परिवर्तन करवाने पर तीन गुना अधिक राशि लगेगी। इससे मालिक को नुकसान होने के साथ ही सरकार की राजस्व आय में बढ़ोतरी होगी। बिना भू परिवर्तन के अन्य उपयोग लेने पर भू राजस्व अधिनियम की धारा 90 ए के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है।
... तो हो सकती है सिवायचक
कृषि भूमि पर खेती के अलावा किसी भी तरह के उपयोग करने पर उक्त भूमि को सिवायचक करने का उपखण्ड अधिकारी को अधिकार है। इसके तहत खेती की भूमि पर अन्य उपयोग करने पर सिवायचक करने के बाद उपयोगकर्ता को प्रशासन द्वारा उक्त भूमि से बेदखल किया जाता है।
बिना भू परिवर्तन के अन्य उपयोग पर होगी कार्रवाई
बिना भू परिवर्तन के यदि किसी के द्वारा खेती की भूमि पर निर्माण करना अवैध है। खेती की भूमि पर अन्य उपयोग या निर्माण कराने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रामस्वरूप शर्मा तहसीलदार नांगल राजावतान।
Published on:
13 Dec 2021 10:00 am
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