
फिर लापरवाही, पानी में भ्रष्टाचार की 'बू'
दौसा. जिले में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है (Water Problem in dausa)। जलदाय विभाग ने पानी के टैंकरों पर जीपीएस नहीं लगा रखे हैं। इससे मॉनिटरिंग ठीक से नहीं हो पा रही है। ठेकेदारों व चहेतों की मिलीभगत के चलते टैंकर निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। दौसा में जलदाय विभाग में पहले भी करीब 250 करोड़ रुपए का घोटाला हो चुका है, जिसकी जांच अभी भी चल रही है। जबकि अब शहर में टैंकरों से पानी की जो जलापूर्ति हो रही है, उसमें भी भ्रष्टाचार (corruption in Water Tanker supply in dausa) की बू सामने आ रही है।
पत्रिका टीम ने गुरुवार सुबह शहर की कई कॉलोनियों में घूम कर जलदाय विभाग के टैंकरों की पड़ताल की तो सच सामने आया। सड़कों व कॉलोनियों में प्राइवेट टैंकर तो दिखे, लेकिन जलदाय विभाग का एक भी टैंकर (Water Tanker) दिखाई नहीं दिया। जलदाय विभाग के अधिकारी व ठेकेदारों का दावा है कि शहर में प्रतिदिन करीब 25 टैंकर करीब 170 फेरे लगाते हैं, लेकिन कहीं पर भी जलदाय विभाग के टैंकर दिखाई नहीं दिए।
उपजिला कलक्टर जवाब सुन रह गए दंग
रोचक तो यह है कि उप जिला कलक्टर डॉ. गोवर्धन लाल शर्मा ने गुरुवार को जलदाय विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय में निरीक्षण के लिए गए तो वहां भी उन्होंने यह अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर विभागीय टैंकरों की व्यवस्था क्या हैं। एक टैंकर चालक से उन्होंने बात की तो उसका जवाब सुन कर उपजिला कलक्टर भी चौंक गए। टैंकर चालक ने उनको बताया कि 'साहब पांच मिनट में टैंकर को बोरवेल से भर दिया जाता है और पांच ही मिनट में खाली हो जाता हैÓ।
जबकि हकीकत सच्चाई यह है कि दौसा में बोरवेलों में किसी भी बोरवेल (Borewell) में इतनी क्षमता नहीं है कि वह इतना पानी डिस्चार्ज करे कि पांच हजार लीटर के टैंकर को पांच मिनट में भरा जा सके। सामान्यत: एक टैंकर 20 से 25 मिनट में भरा जा सकता है। यहां टैंकरों से कॉलानियों में लोगों के बर्तनों में पानी भरा जाता है न कि किसी एक टंकी या भूमिगत टैंक में पानी खाली करना है। ऐसे में उपजिला कलक्टर के भी यह बात गले नहीं उतरी। उपजिला कलक्टर ने बताया कि वे टैंकर की सप्लाई की जांच कराएंगे, उसके बाद ही भुगतान होने देंगे।
दर अच्छी, फिर भी...
जलदाय विभाग संवेदकों को पानी टैंकरों की दर भी अच्छी दे रहा है।मिली जानकारी के अनुसार विभाग प्रति टैंकर 327 रुपए दे रहा है। एक दिन में 170 टैंकर पानी के 55 हजार 590 रुपए चुका रहा है। इस तरह विभाग एक महीने में टैंकरों पर करीब 17 लाख रुपए चुका रहा है।
आखिर क्यों नहीं लग रहे हैं जीपीएस
शहर में पानी के टैंकरों (Water Tanker) में GPS लगा कर उनकी मॉनिटरिंग करने की बात पांच-सात वर्ष पहले से ही चल रही है। विभागीय अधिकारियों ने कई बार जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिखे हैं। पिछले वर्षों तो टैण्डर तक भी हुए है, लेकिन आज तक टैंकरों पर जीपीएस नहीं लग पाए हैं। यही कारण है कि टैंकर चालक अपनी मनमर्जी से टैंकरों में पानी भर कर कहां ले जाते हैं, इसका किसी को पता नहीं है।
फैक्ट फाइल
टैंकर - 25
टैंकरों के फेरे - 170
प्रति टैंकर भुगतान - 327 रुपए
एक दिन का भुगतान - 55590
एक महीने का भुगतान - 1723290
शहर में तीन संवेदकों के माध्यम से पानी के टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। करीब 25 टंैकर शहर में प्रतिदिन करीब 170 टैंकर पानी सप्लाई कर रहे हैं। जीपीएस तो नहीं लगे हुए हैं, जहां से टैंकर पानी भर कर लाते हैं, वहां पर विभागीय कर्मचारियों को रजिस्टर लेकर बैठा रखा है। वे रजिस्टर में एंट्री कर रहे हैं।
- रंगलाल सैनी, सहायक अभियंता जलदाय विभाग दौसा
corruption in water Tanker supply in dausa
Published on:
21 Jun 2019 07:52 am
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