
पुलिस की गिरफ्त में दोनों आरोपी। फोटो: पत्रिका
दौसा। राजस्थान के दौसा जिले में साइबर थाना पुलिस ने एक नामी पेंट्स कंपनी के रिवॉर्ड प्रोग्राम में सेंध लगाकर 1.72 करोड़ रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शंकर लाल मीणा और साइबर क्राइम डीएसपी बृजेश कुमार मीणा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए रिंकू कुमार सैनी और राहुल कुमार सैनी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार कंपनी के एसोसिएट जनरल मैनेजर स्नेहम्बर सिंह ने 11 अगस्त 2025 को दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि कंपनी के मास्टरस्ट्रोक रिवॉर्ड प्रोग्राम में तकनीकी हेरफेर कर आरोपियों ने बिना उत्पाद खरीदे ही 12 से 15 अंकों वाले क्यूआर कोड का अनुमान लगाया और फर्जी क्यूआर कोड तैयार कर उन्हें ऐप में रिडीम कर लिया। इस तरह कंपनी को 1,72,86,297 रुपए का नुकसान पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दौसा साइबर थाना पुलिस ने विशेष जांच टीम बनाई।
डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके ठिकानों पर दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान दौसा साइबर थाना पुलिस ने आरोपी रिंकू कुमार सैनी निवासी गीता देवी हॉस्पिटल के पास खीरी वाली ढाणी लालसोट और राहुल कुमार सैनी निवासी वीर तेजाजी की ढाणी टोडा गंगा लालसोट को गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में पूर्व में अनिल कुमार सैनी और विष्णू कुमार सैनी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
कई पेंट्स कंपनियों ने अपनी सेल बढ़ाने एवं पेंट्स के कार्य से जुड़े मजदूरों को आकर्षित करने के लिए एक टोकन के माध्यम से नगद राशि उपहार स्वरूप देने की योजना लागू की थी। जिसके तहत बाल्टी खोलने के बाद उसमें मिलने वाले कूपन को मास्टर स्ट्रोक ऐप पर स्कैन करने या कूपन पर दिए कोड नंबर डालकर 20 से लेकर 500 रुपए तक इनामी राशि दी जा रही थी।
इस स्कीम के बारे में साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों को जब जानकारी मिली तो उन्होंने किसी एक कूपन पर दिए कोड नंबर के आधार पर आगे क्रम अनुसार व अनुमान के अनुसार ऐप पर कोड डालकर इनामी राशि का लाभ उठाना शुरू कर दिया एवं अपने खातों में राशि को ट्रांसफर कर ली। सबसे बड़ी हैरानी की बात थी यह रही कि जो कूपन के पेंट्स की बाल्टी अंदर था, और कूपन भी बाल्टी में मौजूद था, उसके बाद भी साइबर फ्रॉड करने वालों ने कूपन के कोड नंबर का अनुमान लगाकर कंपनियों को करोड़ों रुपए की चपत लगा दी।
Updated on:
26 Jun 2026, 1:09 PM IST
Published on:
26 Jun 2026, 1:09 PM IST
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