
In cases of kidnapping police rush unnecessarily
दौसा. परिवार में किसी का अपहरण हो जाए तो सनसनी सी फैल जाती है, लेकिन जिले के लोग इस अपहरण के मामलों का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। पुलिस की ओर से जिले के विभिन्न पुलिस थानों में गत तीन वर्ष में दर्ज हुए अपहरण के मामलों में लगाई गई एफआर में इसका खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि पुलिस ने अन्य आपराधिक मामलों के खुलासे में भले ही ज्यादा गम्भीरता नहीं दिखाई हो, लेकिन अपहरण के 86 प्रतिशत मामलों में कार्रवाई कर अपहृतों को दस्तयाब कर लिया। इसके बाद पुलिस की ओर से 55 प्रतिशत में अदम बकू (गलतफहमी झूठ) में एफआर लगानी पड़ी। ऐसे में पुलिस का कीमती समय व धन व्यर्थ खर्च हो गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार जनवरी 2014 से दिसम्बर 2016 तक जिले के विभिन्न थानों में अपहरण के कुल 340 मामले दर्ज हुए। इनमें से दस्तयाबी के बाद अपहृत की ओर से स्वेच्छा से जाने के बयान देने पर पुलिस को 55 प्रतिशत यानी 186 मामलों में एफआर लगानी पड़ी है। इसी प्रकार जहां पुलिस ने 78 मामलों में अपहृतों को बरामद कर परिजनों के सुपुर्दकर दिया, वहीं आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके अलावा 45 मामले जांच के नाम पर आज भी पेंडिग हैं।
संदिग्धों के खिलाफ दर्ज कराते मामले
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किसी भी युवती, युवक व अन्य व्यक्ति के घर से बिना बताए कहीं चले जाने पर परिजन थानों में संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज करा देते हैं। पुलिस मामलों को गम्भीरता से लेते हुए जब अपहृतों को दस्तयाब कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लाती है तो अपहृत स्वयं की मर्जी से जाने का बयान दे देते हैं।
उस दौरान परिजन अपहृत पर आरोपित के खिलाफबयान देने के लिए जमकर दबाव बनाने का प्रयास भी करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। इसके बाद परिजन गलतफहमी में मामला दर्ज कराना बताकर पीछा छुड़ा लेते हैं। इसी प्रकार कई युवक बिना बताए दोस्तों के साथ घूमने चले जाते हैं। इस पर परिजन अपहरण का मामला दर्जकरा देते हैं। ऐसे में जिले में अपहरण के मामले सर्वाधिक झूठे निकलते हैं।
56 अपहृतों के परिजनों को आज भी इंतजार
पुलिस ने दर्ज हुए 340 मामलों में भले ही 284 मामलों में अपहृतों को दस्तयाब कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन 56 मामलों में परिजनों को अभी भी अपनो का इंतजार है। खास बात यह हैकि तीन वर्षों में पुलिस ने 11 मामलों में तो अपहृतों के नहीं मिलने पर अदम पता में एफआर तक लगा दी। इसके अलावा अन्य 45 मामले आज भी जांच के नाम पर लम्बित है। उनके परिजन अपनों की बरामदगी के लिए आए दिन पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस उन्हें आश्वासन देकर टरका रही हैं।
नहीं कर पाते कार्रवाई
अपहरण के मामलों में अपहृतों के स्वेच्छा से जाने का बयान देने पर परिजन गलतफहमी में मामला दर्ज कराने का कारण बताते हैं। पुलिस को उन मामलों में अदम बकू गलतफहमी में एफआर पेश करनी पड़ती है। ऐसे में इन मामलों में मामला दर्ज कराने वालों के खिलाफआईपीसी की धारा 182/211 के तहत कार्रवाईनहीं की जाती है। हालांकि वास्तविकता में झूठा मामला पाए जाने पर कार्रवाईकी जाती है। इसके तहत गत वर्ष अपहरण का झूठा मामला दर्जकराने वाले करीब 52 लोगों के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासे पेश किए गए हैं।
कर रहे हैं प्रयास
अपहरण के मामलों में पुलिस ने 284 मामलों में अपहृतों को बरामद कर आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अपहृतों के स्वेच्छा से जाने के बयान पर 186 मामलों में एफआर पेश कर दी तथा 78 में चालान पेश कर दिए। शेष मामलों में भी जल्द ही अपहृतों को बरामद कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
योगेश यादव, पुलिस अधीक्षक, दौसा
तीन वर्ष के अपहरण के मामलों की तुलना
वर्ष कुल मामले अदम बकू अदम पता चालान लम्बित
2014 123 76 2 31 14
2015 94 66 2 14 12
2016 123 64 7 33 19
Published on:
07 Feb 2017 10:53 am
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