दौसा. बढ़ती आबादी एवं लचर प्रबंधन के कारण सरकार को स्वच्छता को एक अभियान के रूप में चलाना पड़ रहा हो, लेकिन आजादी से पहले एवं उसके बाद तक सफाई रोजमर्रा के कार्यों में रची बसी थी। घरों से निकलने वाले कचरे की छंटनी कर अन्य कार्यों में पुर्नउपयोग में लिया जाता था। ऐसे में कचरा प्रबंधन एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी, लेकिन वर्तमान में लोगों की व्यस्तता के चलते सफाई के मामले में सरकारी संसाधन या दूसरे लोगों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।