
Life of Vedic ideas in life- Shankaracharya
मेहंदीपुर बालाजी. गोवर्धनमठ पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती तीन दिवसीय प्रवास पर आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी पहुंचे। जहां उन्होंने धर्मसंघ पीठ परिषद् व आदित्य वाहिनी राजस्थान द्वारा आयोजित 18वां साधना व राष्ट्ररक्षा शिविर में उद्बोधन देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
सुबह सवा 10 बजे अंजनी महल के पास तैयार किए गए सभागार में पहुंचने पर जगद्गुरु शंकराचार्य का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर शंकराचार्य ने कहा कि जीवन में वेद व भागवत विचारों का समावेश करने का प्रयास करना चाहिए। सुव्यवस्थित जीवन शैली के लिए मन में कुविचारों का आवागमन नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीव के पालन कर्ता-हर्ता स्वयं ईश्वर हैं। ऐसे में आत्म शुद्धि व स्वविकास के लिए मनुष्य को परमात्मा का वरण करना चाहिए। शंकराचार्य सरस्वती ने कहा कि मनुष्य को भ्रम है कि ईश्वर का ध्यान करने से कोई लाभ नहीं है, लेकिन काम, क्रोध व लोभ की मोहमाया के प्रभाव में फंसा रहने से जीवमात्र का कल्याण संभव नहीं है।
उनका उद्देश्य है कि समाज में ऐसे लोगों का निर्माण हो, जो पुरुषार्थ के साथ समाज को सदप्रेरणा दे सकें तथा सद्विचारों का प्रचार-प्रसार करने में सहायक हो। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति महाप्रलय के समय भी विचलित नहीं होता है, वहीं व्यक्ति पुरूषार्थशाली युगपुरुष है।
बंधुओं से विवाद कर जूझना मनुष्य को स्वयं अपनी छाया से जूझने के समान है। बंधुओं से आत्मीय लगाव के साथ रहते हुए विद्या, चरित्र व बुद्धि के साथ देश व समाज के उत्थान के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए।
इससे पूर्व ओमप्रकाश सेवा सदन में शंकराचार्य का धर्मसंघ पीठ परिषद व आदित्य वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। परिषद के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि साधना व राष्ट्ररक्षा शिविर 23 अप्रेल तक चलेगा। इसमें देशभर के 22 प्रांतों के प्रतिनिधि, संत महात्मा व साधकगण बड़ी संख्या में शामिल हो रहे।
तीन दिवसीय शिविर में सुबह 10 से 2 बजे तक साधना का स्वरूप और फल तथा शाम साढ़े चार से साढ़े सात बजे तक देश की दिशा और अपेक्षित दिशा विषय पर मौलिक चिंतन व शंकराचार्य का उद्बोधन होगा। शिविर के दौरान हनुमान चालीसा का अखण्ड पाठ भी किया जा रहा है।
शिविर में स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, लालसोट विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीना, सिकराय विधायक गीता वर्मा, ज्योतिषाचार्य संतोषचंद पाण्डेय, धुंधीराम मीना, नरेश करोड़ी, राजाराम सीमला, आनंद वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंतदास, ब्रह्मनंद सरस्वती, इंदिरा, सीमा तिवाड़ी आदि मौजूद थे।
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