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दौसा मॉब लिंचिंग मामले में मंत्री किरोड़ी लाल का आया बयान, बोले- ‘ऐसा नहीं चल सकता, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’

राजस्थान के दौसा जिले में युवक को पेड़ से बांधकर भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में प्रदेश के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। साथ ही इस तरह की घटना पर हैरानी जताते हुए इसे समाज के लिए खतरनाक बताया है।
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दौसा

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Kamal Mishra

May 31, 2026

Kirodi Lal Meena

Dr. Kirodi Lal Meena - File PIC

दौसा । जिले के बांदीकुई इलाके में बाइक चोरी के संदेह में युवक की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। बसवा थाना क्षेत्र के पंडितपुरा गांव में हुई इस घटना में पुलिस ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार 28 मई को बांदीकुई निवासी 32 वर्षीय दिनेश मीणा घर से निकला था। इसी दौरान पंडितपुरा गांव के पास कुछ लोगों ने उस पर बाइक चोरी का शक जताया। आरोप है कि युवक को पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया गया और उसके साथ मारपीट की गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।

5 आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच शुरू की। वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अशोक सैनी, रिंकू सैनी, रायसिंह सैनी, महेंद्र सैनी और गिर्राज सैनी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ हत्या, अवैध रूप से बंधक बनाने और एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

मंत्री ने घटना पर जताया दुख

इस बीच मेहंदीपुर बालाजी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी प्रवृत्ति खतरनाक है, जहां लोग स्वयं ही अदालत और थानेदार बनने लगते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर संदेह था तो उसे पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए था। कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि भीड़ की।

परिजनों को दी गई आर्थिक सहायता

गौरतलब है कि घटना के बाद मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। करीब 21 घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन ने परिजनों को आर्थिक सहायता, संविदा पर नौकरी और मामले की जांच संबंधी मांगें स्वीकार कीं। इसके बाद धरना समाप्त हुआ और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

सरकार गंभीरता से ले रही- मंत्री

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।