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जन-जन की आस्था का है केन्द्र दौसा का नीलकंठ महादेव मंदिर

अरावली पर्वत शृंखला की नीलगिरि पहाड़ी पर स्थित है

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Nilkanth Mahadev temple of Dausa is of the people's faith

जन-जन की आस्था का है केन्द्र दौसा का नीलकंठ महादेव मंदिर

राजेन्द्र जैन
दौसा. देवनगरी दौसा में नीलकंठ महादेव मंदिर नीलगिरि पहाड़ी पर करीब 300 फीट की ऊंचाई पर है। यह मंदिर 7वीं सदी में कच्छावा राज्य वंश के राजा सोढ़देव ने बनाया था। मंदिर में नीलकंठ महाकाल (भूतनाथ) के शिवलिंग स्थापित किए गए। नीलकंठ महादेव, दौसा के प्राचीन मंदिरों में से एक महादेव या भगवान शिव का मंदिर है। पंच महादेव के रूप में लोकप्रिय यह मंदिर अरावली पर्वत शृंखला की नीलगिरि पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर में एक बड़ा पाषाण का शिवलिंग है। मंदिर में जाने के लिए दौसा शहर के पूर्वी हिस्से बने सूप आकार के विशाल किले के हाथीपोल दरवाजे में होकर साढ़े तीन सौ सीढिय़ां बनी हुई है।

इस मंदिर के समीप ही प्राचीन किला है। जो कि वर्तमान में देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। यहां प्रतिवर्ष श्रावण माह में तो श्रद्धालुओं की रेलमपेल बनी रहती है। जन-जन की आस्था के केन्द्र नीलकंठ महादेव मंदिर में तीन दिवसीय मेला आयोजित होता है। मेले के दौरान शोभायात्रा निकाली जाती है। जिसमें सभी समाजों के लोग हिस्सा लेकर सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं। श्रावण माह में तो आलम यह रहता है अलसवेरे चार बजे से लेकर देर रात्रि तक श्रद्धालुओं की रेलमपेल बनी रहती है। श्रद्धालु यहां आक धतूरे आदि सामग्री से भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक कर मनौती मांगते हैं। उल्लेखनीय है कि दौसा देवनगरी में नीलकंठ ही नहीं यहां पर सोमनाथ, गुप्तेश्वर, बैजनाथ, सहजनाथ महादेव प्राचीन मंदिर हैं।

दिनभर रहीं श्रद्धालुओं की रेलमपेल
दौसा. देवनगरी दौसा में जन-जन की आस्था का केन्द्र नीलकंठ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर कई आयोजन हुए। इस दौरान मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया । नीलकंठ महादेव धर्मसेवा समिति, देवगिरि के तत्वावधान में महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर फूल बंगला झांकी सजाकर रात्रि को जयपुर, अलवर, सुल्तानगंज, सिकंदरा के कलाकारों द्वारा एक से बढकऱ एक भजनो की प्रस्तुति दी गई। समिति के महामंत्री राकेश जाकड़ ने बताया कि चार मार्च को सुबह से लक्खी मेला भरा। इसमें दौसा सहित आस-पास के गांवों के लोगों ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी। सुबह से देर रात श्रद्धालुओं की रेलमपेल बनी रही। मंदिर की तलहटी में लगी अस्थाई दुकानों पर लोगों ने चाट पकौड़ी खाने का लुत्फ उठाया।