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राजस्थान चुनाव: टिकटों में देरी प्रत्याशियों की बढ़ाएगी चुनौती, प्रचार के लिए मिलेंगे कम दिन

Rajasthan Election: दौसा जिले में भाजपा सहित अन्य दलों की ओर से टिकट वितरण में हो रही देरी प्रत्याशियों की चुनौती भी बढ़ा रही है। आगामी 25 नवम्बर को प्रदेश की 200 सीटों पर मतदान होना है।

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दौसा

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Nupur Sharma

Oct 31, 2023

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Rajasthan Assembly Election 2023 : दौसा जिले में भाजपा सहित अन्य दलों की ओर से टिकट वितरण में हो रही देरी प्रत्याशियों की चुनौती भी बढ़ा रही है। आगामी 25 नवम्बर को प्रदेश की 200 सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में अब प्रत्याशियों के पास प्रचार के लिए मात्र तीन सप्ताह शेष रहे हैं। ऐसे में यदि अब भाजपा सहित अन्य दलों की सूचियों में देरी होती है तो प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर मतदाता तक सम्पर्क बनाने की होगी। जिले की ज्यादातर विधानसभाओं में सवा दो से ढाई लाख तक मतदाता हैं। यदि अब भी टिकट मिलता है तो हर मतदाता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रतिदिन 10-12 हजार से अधिक मतदाताओं से संपर्क करना होगा। खास बात यह है कि कांग्रेस ने पांचों सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। वहीं भाजपा ने लालसोट व बांदीकुई में ही टिकट घोषित किया है। सिकराय, महुवा व दौसा में भाजपा की ओर से चेहरे घोषित किया जाना अभी शेष है। वहीं आप, बसपा सहित अन्य दलों के भी प्रत्याशी जिले की कुछ सीटों पर घोषित होने हैं। पहली-दूसरी सूची में टिकट हासिल करने वाले प्रत्याशियों की ओर से अब तक प्रमुख ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम हो चुके हैं। कार्यालय खोलकर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां भी दी जा चुकी है। जिले में लालसोट व बांदीकुई में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी घोषित होने पर चुनावी रंगत परवान चढ़ चुकी है। वहीं दौसा, सिकराय व महुवा में भाजपा के प्रत्याशी घोषित नहीं होने से अभी कार्यकर्ता असमंजस में नजर आ रहे हैं। प्रचार अभियान चालू नहीं होने से स्थानीय पदाधिकारी चिंतित हैं।

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चेहरे नए हुए तो पहचान बनाने में होगी दिक्कत: टिकट से शेष रही सीटों पर अगर नए चेहरों को मैदान में उतार गया तो उन्हें पहचान बनाने में और दिक्कत होगी। बाहरी प्रत्याशी हुआ तो गांव-गली के बारे में पता लगाने में भी वक्त लगेगा। ऐसे में संगठन की जिम्मेदारी अहम हो जाएगी।

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टिकट पाने वाले कर रहे हैं दौड़भाग
जिन दावेदारों को दलों से टिकट मिल चुका है, वे दिन-रात दौड़भाग में लगे हुए हैं। कोई मतदाताओं को चरण छू रहा है तो कोई देवी-देवताओं के स्थानों पर जाकर ढोक लगा रहा है। गांवों में समर्थक भी टीम लेकर पहुंच रहे हैं। प्रभावशाली लोगों से मिलकर उन्हें अपने पक्ष में किया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल प्रचार भी चल रहा है। ऐसे में आशंका है कि देरी से टिकट पाने वाले इन उम्मीदवारों से प्रचार-प्रसार में पीछे रह जाएंगे।