
Samleti Bomb Blast: सुप्रीम कोर्ट का समलेटी धमाके पर बड़ा फैसला (फोटो-पत्रिका)
दौसा। करीब 30 साल पहले राजस्थान के दौसा जिले में हुए चर्चित समलेटी बस बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद को सुनाई गई मौत की सजा और दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा चलाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने माना कि मूल ट्रायल के दौरान आरोपी को प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित हुआ। इसी आधार पर पूरे मामले की दोबारा सुनवाई कराने का आदेश दिया गया है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट के वर्ष 2019 के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें डॉ. हमीद की फांसी की सजा बरकरार रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करेंगे, जहां नए सिरे से ट्रायल होगा। अदालत ने यह भी कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया एक वर्ष के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए और मामले की सुनवाई ऐसे न्यायिक अधिकारी करें, जिन्हें सत्र मामलों का पर्याप्त न्यायिक अनुभव हो।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में की गई टिप्पणियां केवल पहले ट्रायल की वैधता और निष्पक्षता तक सीमित हैं। नए ट्रायल के दौरान विशेष अदालत सभी साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी और किसी पूर्व टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाएगी।
इसी मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। साथ ही राजस्थान सरकार की ओर से उसकी स्थायी पैरोल को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी गई। अदालत ने जावेद खान और अब्दुल गनी सहित अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपीलों को भी स्वीकार नहीं किया।
समलेटी बस बम विस्फोट 22 मई 1996 को दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र में हुआ था। आगरा से बीकानेर जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में शाम करीब चार बजे हुए धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 37 यात्री घायल हुए थे। यह विस्फोट दिल्ली के लाजपत नगर बम धमाके के ठीक एक दिन बाद हुआ था, जिससे उस समय पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं।
जांच के दौरान स्थानीय पुलिस और सीबी-सीआईडी ने विभिन्न राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार किया था। चार अलग-अलग चरणों में चार्जशीट दाखिल की गई और आरोप लगाया गया कि कुछ आरोपी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़े थे। वर्ष 2014 में बांदीकुई की विशेष अदालत ने डॉ. अब्दुल हमीद को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि 7 अन्य आरोपियों को उम्रकैद दी गई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान हाई कोर्ट ने 6 आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन डॉ. हमीद की फांसी और पप्पू उर्फ सलीम की उम्रकैद को बरकरार रखा था।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद डॉ. अब्दुल हमीद के खिलाफ मुकदमे की पूरी सुनवाई फिर से होगी। वहीं अन्य आरोपियों के संबंध में भी शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की अपीलें खारिज कर दी हैं।
Updated on:
21 Jul 2026 05:10 pm
Published on:
21 Jul 2026 04:58 pm
