
OMR में हेराफेरी करने वाला आरोपी (Photo-Patrika)
OMR Sheet Scam: राजस्थान की लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा में सामने आए OMR शीट फर्जीवाड़े में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। रविवार रात दौसा जिले के बांदीकुई के रहने वाले 30 साल के पंकज कुमार सैनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, आरोपी ने OMR शीट में हेराफेरी के जरिए गलत तरीके से सरकारी नौकरी हासिल की थी। इस भर्ती घोटाले को लेकर साल 2025 में मामला दर्ज किया गया था और इसकी जांच अभी लगातार जारी है।
जांच में सामने आया कि दौसा के रहने वाले पंकज कुमार की असली OMR शीट में सिर्फ 4 नंबर थे, लेकिन स्कैनिंग के दौरान रिकॉर्ड में उसके 191 अंक रिकॉर्ड कर दिए गए। इसी फर्जी स्कोर के आधार पर उसे लैब असिस्टेंट भर्ती में सेलेक्ट कर लिया गया। बाद में कर्मचारी चयन बोर्ड ने OMR शीट की दोबारा स्कैनिंग करवाई तो पूरा खेल सामने आ गया। दोबारा जांच में साफ हो गया कि अभ्यर्थी के असल में नंबर सिर्फ 4 ही थे और स्कैनिंग के जरिए रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई थी।
एसओजी की जांच में पता चला कि परीक्षा की OMR शीट स्कैनिंग का काम राभव लिमिटेड नाम की एजेंसी को दिया गया था। आरोप है कि एजेंसी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने कुछ अभ्यर्थियों के साथ मिलकर OMR शीट में हेराफेरी की। जांच के अनुसार, टोटल 27 अभ्यर्थियों को इसी तरीके से गलत तरीके से सेलेक्टेड स्टूडेंट्स की लास्ट लिस्ट में जगह दिलाई गई। एजेंसी के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल होने के आरोप हैं।
इस मामले में एसओजी पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। स्कैनिंग एजेंसी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़, शादान खान और कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। इनके अलावा OMR शीट में बदलाव कर चयन पाने वाले महेंद्र कुमार मीणा, देवेंद्र सिंह गुर्जर, विजय सिंह मीणा, पिंटू कुमार मीणा और संजय कुमार सैनी को भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। अब पंकज कुमार सैनी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी इस भर्ती घोटाले से जुड़े बाकी लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
Updated on:
20 Jul 2026 05:58 pm
Published on:
20 Jul 2026 04:35 pm
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