
Child marriage suffers pain
दौसा. जिले में शिक्षा का उजियारा लगातार फैलता जा रहा है, लेकिन समाज के लिए कलंक बाल विवाह जैसी कुरीति समाप्त होने का ही नाम ले रही है। इसी का नतीजा है कि नाबालिगों के बचपन में हाथ पीले करने के बाद उसका दर्द जीवन भर सहना पड़ता है। विभिन्न क्षेत्रों में अव्वल रहने वाला दौसा जिला बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के क्षेत्र में भी अग्रणी रहा है।
यहां की प्रतिभाओं ने खेल, शिक्षा, मनोरंजन सहित अन्य विधाओं में राष्ट्र स्तर भी दौसा का नाम कमाया है। इन सबके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में बाल विवाह चोरी-छिपे जारी है। बाल विवाह रोकथाम के लिए जनप्रतिनिधियों व आमजन ने अपने सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि जनचेतना से ही बाल विवाह पर अंकुश किया जा सकता है।
जनचेतना जरूरी
बाल विवाह जैसे सामाजिक कलंंक को समाप्त करने के लिए सरकार हमेशा प्रयासरत है। जनचेतना से ही बाल विवाह जैसी कुरीति को रोका जा सकता है। इसके लिए सभी लोगों को संकल्प लेना होगा। बाल विवाह रोकथाम के लिए जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना होगा।
डीसी बैरवा, प्रधान पंचायत समिति दौसा
प्रशासन रहे मुस्तैद
बाल विवाह रोकथाम के लिए सरकार ही नहीं, आमजन को भी इस बुराई को समाप्त करने के लिए आगे आना होगा। आखातीज, पीपल पूर्णिमा सहित अन्य अबूझ सावों की रोकथाम के लिए प्रशासन भी मुस्तैद रहे।
वीरेन्द्र शर्मा, उपसभापति, नगर परिषद
कन्ट्रोल रूप पर दें सूचना
बाल विवाह से आज तक किसी को कोई फायदा नहीं हुआ है। इससे तो नुकसान ही नुकसान होता है। आमजन को भी चाहिए कि वे बाल विवाह में शामिल नहीं होकर उसकी सूचना तुरंत उपखण्ड मुख्यालयों पर बनाए गए कंट्रोल रूम को दें।
प्रेम हरितवाल, दवा व्यवसायी
सरकार उठाए ठोस कदम
बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।लोग खेलने ने कूदने की उम्र में ही बच्चो का विवाह कर उनके जीवन को बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस अपराध की रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम उठाये व इस अपराध को करने वालों को कडी से कडी सजा दे।
बादाम सैनी, प्रधान, पंचायत समिति सिकराय
छिन जाता है बचपन
छोटी उम्र में विवाह करने से बच्चों का बचपन छिन जाता है। छोटी उम्र में विवाह के बाद खेलने कूदने की उम्र्र में परिवार की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।
रेणू मीना, अध्यक्ष सरपंच संघ सिकराय
Published on:
21 Apr 2017 11:01 am
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