19 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

12 तेंदुए निकले बेगुनाह :  पिजरों से किए बाइज्जत बरी, दो का फैसला होना शेष, आदमखोर कौन

Clean Chit To Leopards : विभागीय जांच में 12 तेंदुए बेगुनाह साबित हुए हैं। लिहाजा उन्हें पिंजरों से बाइज्जत बरी कर दिया गया है। इनके अलावा दो और तेंदुओं के भविष्य का फैसला जल्द होने वाला है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि असली गुनहगार (आदमखोर) तेंदुए कहां गए।

2 min read
Google source verification
Lab tests have found 12 leopards innocent and they have been released from cages into the wild

पिंजरे में तेंदुआ, फाइल फोटो

Clean Chit To Leopards : आदमखोर होने के आरोप में लोहे के पिंजरों में कैद किए गए 12 तेंदुए विभागीय जांच में बेगुनाह साबित हुए हैं। बता दें कि उत्तराखंड में वन्यजीवों का आतंक छाया हुआ है। आए दिन यहां तेंदुए या बाघ लोगों को निवाला बना रहे हैं। पिछले कुछ सालों के भीतर तेंदुए और बाघ राज्य में सैकड़ों लोगों को निवाला बना चुके हैं। ऐसी घटनाएं सामने आने पर वन विभाग संबंधित क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाकर आदमखोर वन्यजीवों को कैद करता रहता है। पहाड़ों में गुलदारों की दहशत पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गई है। पकड़े गए तेंदुओं को वन विभाग अल्मोड़ा के एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजता है। पिछले साल वन विभाग ने आदमखोर समझकर 14 तेंदुए पकड़ कर उन्हें अल्मोड़ा के रेस्क्यू सेंटर में रखा था। उसके बाद तेंदुओं के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे। लैब की रिपोर्ट के अनुसार विभन्न क्षेत्रों से पकड़े गए 12 तेंदुए आदमखोर नहीं हैं। लिहाजा वन विभाग ने 12 तेंदुओं को दोषमुक्त करते हुए वापस जंगलों में छोड़ दिया है। बड़ा सवाल ये है कि असल आदमखोर तेंदुए कहां हैं। इधर, मृग विहार रेस्क्यू सेंटर के रेंजर किशोर गोस्वामी के मुताबिक पिछले एक साल में कुल 14 गुलदार रेस्क्यू किए गए हैं। जांच में आदमखोर नहीं पाए जाने पर 12 गुलदारों को छोड़ दिया गया है। दो गुलदारों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

महीनों तक काटी सजा

छोड़े गए 12 तेंदुओं ने निर्दोश होने के बावजूद महीनों तक रेस्क्यू सेंटर में सजा काटी। उनसे उनका जंगल दूर रहा। जांच रिपोर्ट आते ही तेंदुओं को वापस जंगलों में छोड़ दिया गया है। हालांकि दो अन्य तेंदुओं की रिपोर्ट आनी अभी शेष है। रिपोर्ट आने तक वह तेंदुए रेक्क्यू सेंटर में ही रहेंगे। इन दो गुलदारों की अभी रिपोर्ट नहीं आई है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती इन्हें तब तक कैद में ही रहना होगा। इनमें काली कुमाऊं और लोहाघाट से रेस्क्यू किए गुलदार शामिल हैं।

घायल मादा गुलदार को किया रेस्क्यू

बागेश्वर रेंज क्षेत्र के रवाईखाल बिझौरीझाल में वन विभाग ने एक घायल मादा गुलदार का रेस्क्यू किया। उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर सुरक्षित जगह छोड़ा जाएगा। शनिवार को बिजोरीझाल में ग्रामीणों ने गोपाल सिंह के मकान के पीछे एक गुलदार को घायलावस्था में देखा गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रेंजर केवलानंद पांडे के नेतृत्व में टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाया और गुलदार को ट्रेंक्यूलाइज कर बेहोश किया और सुरक्षित कब्जे में लिया। इसके बाद उसे वन विभाग के केंद्र में ले जाया गया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया की उसका उपचार कर ही सुरक्षित स्थान में छोड़ा जाएगा। इस रेस्क्यू अभियान में वन दरोगा तारा सिंह, वन दरोगा नवीन कुमार, बीट अधिकारी चंदन राम, हेम पाठक और सीआरटी टीम के सदस्य शामिल रहे।