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अटल जी के उत्तराखंड से प्रेम को बताते हुए बोले खंडूड़ी-सुशासन तो वाकई अटल जी की ही देन

प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी उत्तराखंड जब भी आते वे मसूरी ,नैनीताल और देहरादून जरूर घूमते...

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भुवन चंद्र खंडूड़ी

भुवन चंद्र खंडूड़ी

(पत्रिका ब्यूरो,देहरादून): पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव शुरू से ही रहा है। उत्तराखंड वाजपेयी की ही देन है। नए राज्य के गठन के पक्ष में उस समय वाजपेयी मंत्रिमंडल के मंत्री भी नहीं थे। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने पहाड़ के लोगों को उत्तराखंड राज्य का गठन कर एक एेसा बेहतरीन तोहफा दिया जिसे उत्तराखंड के लोग कभी नहीं भूला पाएंगे।


प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी उत्तराखंड जब भी आते वे मसूरी ,नैनीताल और देहरादून जरूर घूमते। यहां तक कि नैनीताल जब भी जाते फूटपाथ पर चाय की ठिलिया लगाने वाले हरि भाई की दुकान पर जरूर चाय का आनंद उठाते। प्रधानमंत्री बनने के बाद वाजपेयी ने हरि भाई को दिल्ली भी बुलाया था। ठीक इसी तरह मसूरी में एक चाट की दुकान कृष्ण मोहन साहानी की थी ,वाजपेयी प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जब भी उनकी इच्छा होती उस दुकान से सूखा चाट दिल्ली मंगावाते। हालांकि अब चाट की दुकान बंद हो गई और कृष्ण मोहन साहानी की भी काफी पहले मृत्यु हो गई है।

उत्तराखंड वाजपेयी के दिल में बसता था। इसलिए उत्तराखंड के लोगों के मन में वाजपेयी के प्रति विशेष स्नेह भी रहा है। यही कारण है कि उत्तराखंड के लोग जब भी दिल्ली किसी काम से जाते वाजपेयी के आवास पर जरूर जाते। यह बात भी सत्य है कि वाजपेयी पिछले कई सालों से न ही बोलने की स्थिति में थे और न किसी को पहचान पाते थे। लेकिन उत्तराखंड के लोग उनके आवास पर जाते। उनका हाल चालजानते और फिर लौट आते। वाजपेयी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री रहे और वर्तमान में पौड़ी गढ़वाल के सांसद मेजर जनरल (अवकाश प्राप्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी एक एेसी शख्सियत हैं जो एक माह में दो बार वाजपेयी के आवास पर आवश्य जाते। खंडूड़ी, वाजपेयी के आवास पर 2 से 25 मिनट तक रहते भी थे।

उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे मेजर जनरल (अवकाश प्राप्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी को वाजपेयी के बारे काफी जानकारी है। खंडूड़ी ने वाजपेयी को काफी करीब से देखा है। इस बारे में खुद खंडूड़ी बताते हैं कि वाजपेयी कठिन हालात में भी मुस्कुराते रहते और हंसते रहते। खंडूड़ी ने बताया कि वाजपेयी में निर्णय लेने की अदभुत क्षमता थी। तुरंत फैसला लेते। साथ ही जरूरत पडऩे पर अगले दिन संबंधित व्यक्ति को प्रधानमंत्री कार्यालय भी बुलाते और अपनी बात को स्पष्ट करते।


खंडूड़ी का कहना है कि वे उनके लिए प्रेरणा थे,रहेंगे। इसलिए मैने एक माह में दो बार उनके आवास पर जाने का फैसला लिया। खंडूड़ी का कहना है कि वे बिस्तर पर जरूर थे और स्मरण शक्ति भी खो चुके थे। लेकिन उनके ललाट पर एक चमक थी। खंडूड़ी ने बताया कि दो माह पहले तक उनके निवास पर गया हूं। अटल का आवास तो मेरे लिए मंदिर है। कल भी था और भविष्य में ही रहेगा। खडूड़ी का कहना है कि आज के नेताआें को अटल से शिक्षा लेनी चाहिए। वाकई सुशासन अटल जी की ही देन है।