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गंगोत्री धाम में नहीं मिलेगा गैर-हिंदुओं को प्रवेश, समिति का फैसला, बद्रीनाथ-केदारनाथ में भी हो सकती है नो एंट्री

Gangotri Dham Non-Hindu entry Ban : गंगोत्री धाम में अब गैर हिंदुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह फैसला श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
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देहरादून

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 26 Jan 2026, 4:48 PM IST

गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं का प्रवेश बंद, Pc- Patrika

उत्तराखंड के पवित्र गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं मिलेगा। श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। वहीं, दूसरी ओर बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में भी ऐसा प्रतिबंध लगाने के बारें में विचार किया जा रहा है, जल्द ही प्रस्ताव पेश किया जाएगा।

यह प्रतिबंध केवल गंगोत्री पर ही लागू नहीं होगा। बल्कि मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा पर भी लागू होगा। श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि इस निर्णय के अनुसार, धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रतिबंध देवी के शीतकालीन निवास मुखबा पर भी लागू रहेगा।

बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी लग सकता है प्रतिबंध

इस बीच, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि आगामी बोर्ड बैठक में बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर विचार के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पहले भी उठ चुकी है मांग

गौरतलब है कि मार्च 2025 में केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की विधायक आशा नौटियाल ने भी केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यात्रा प्रबंधन से जुड़ी बैठकों में कुछ ऐसी घटनाओं पर चर्चा हुई, जिनसे केदारनाथ धाम की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ गैर-हिंदू लोग मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, ऐसे में उनके प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

हरिद्वार-ऋषिकेश को 'सनातन पवित्र शहर' घोषित करने की तैयारी

उधर, उत्तराखंड सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को 'सनातन पवित्र शहर' घोषित करने की दिशा में भी विचार कर रही है। इसके तहत हरिद्वार के करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की योजना पर मंथन चल रहा है। यह पहल कुछ संतों और गंगा सभा (जो हर-की-पौड़ी घाट के रखरखाव की जिम्मेदार संस्था है) की मांगों के बाद सामने आई है।

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