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देहरादून : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार या किसी आपराधिक मामले की जांच के नाम पर किसी गैर-आरोपी व्यक्ति का बैंक खाता अनिश्चितकाल तक फ्रीज नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल मुकदमे की लंबित स्थिति ही किसी ऐसे व्यक्ति की संपत्ति को हमेशा के लिए कुर्क करने का आधार नहीं बन सकती, जो खुद आरोपी नहीं है।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने 3 जनवरी को जारी आदेश में एक व्यक्ति की छह साल पुरानी याचिका को मंजूर करते हुए उसके बैंक खाते को अनफ्रीज करने का निर्देश दिया। यह खाता 2018 से एक भूमि मुआवजा घोटाले की जांच के सिलसिले में फ्रीज था, जबकि याचिकाकर्ता न तो एफआईआर में आरोपी था और न ही चार्जशीट में उसका नाम शामिल किया गया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'केवल आपराधिक मुकदमे की लंबित स्थिति ही किसी ऐसे व्यक्ति की संपत्ति को अनिश्चितकाल तक फ्रीज करने का औचित्य नहीं सिद्ध कर सकती, जो खुद मुकदमे का सामना नहीं कर रहा है।'
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की दलील को स्वीकार कर लिया जाए तो जांच एजेंसी को बिना ट्रायल, बिना दोषसिद्धि और बिना न्यायिक निगरानी के वर्षों तक संपत्ति कुर्क रखने की असीमित शक्ति मिल जाएगी, जो कानून के शासन के पूरी तरह विपरीत होगा।
यह मामला एक कथित भूमि मुआवजा घोटाले से जुड़ा है। आरोप था कि कृषि भूमि को गैर-कृषि दिखाकर पुराने तारीख वाले आदेश हासिल किए गए और इससे अधिक मुआवजा दिलवाया गया। जांच के दौरान जांच अधिकारी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से याचिकाकर्ता के खाते को फ्रीज करने का अनुरोध किया, क्योंकि कथित तौर पर मुआवजा राशि उसी खाते में जमा की गई थी। याचिकाकर्ता भूमि मालिक के बेटे हैं।
याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट में खाता अनफ्रीज करने की अर्जी दी, लेकिन हल्द्वानी की विशेष अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने खाते को अनफ्रीज करने का आदेश देते हुए शर्त लगाई कि याचिकाकर्ता अपराध से जुड़ी कथित राशि के बराबर पर्याप्त सिक्योरिटी (जमानत) जमा करे। इससे जांच के हितों की रक्षा भी हो जाएगी।
Updated on:
07 Jan 2026 08:35 pm
Published on:
07 Jan 2026 08:35 pm
