
साइबर पुलिस स्टेशन
राज्य में वर्क फ्रॉम होम के जरिए कमाई के मैसेज हर रोज बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल फोन पर पहुंच रहे हैं। इस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी प्रचारित कराई जाती हैं। गिरोह से जुड़े साइबर ठग फर्जी वेबसाइट, टेलीग्राम और व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर रखते हैं। लोगों की रुचि दिखते ही उन्हें झांसे में लेने के लिए टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ देते हैं। उसके बाद उनके चंगुल में फंसकर युवा पसीने की कमाई लुटा बैठ रहे हैं। उत्तराखंड में इस साल अब तक युवा करीब आठ करोड़ ऐसे ही गंवा चुके हैं।
होटल-रेस्टोरेंट के दे रहे लिंक
ये अधिकांश ग्रुप आनली फॉर एडमिन होते हैं। यानी जुड़ने वाला व्यक्ति ग्रुप में अपनी ओर से कुछ नहीं लिख पाता है। ग्रुप में लोगों के जुड़ने पर शुरुआत में होटल या रेस्टोरेंट के सोशल मीडिया लिंक दिए जाते हैं। उन पर बेहतर कमेंट और शेयर करने पर मोटे कमीशन का लालच दिया जाता है।
शुरुआत में डालते हैं चारा
साइबर ठग शुरुआत में लोगों को 250 से एक हजार रुपये तक देते हैं। ये धनराशि चारा फेंकने के लिए होती है। बाद में उन्हें एक साथ लाखों रुपये के टास्क दे दिए जाते हैं। यह टास्क रकम निवेश से जुड़े होते हैं।
दिखाया जाता है बड़े लाभ का सपना
जो लोग रकम निवेश करते हैं तो उन्हें ग्रुप में बड़ा लाभ दिखाया जाता है। इसके बाद रकम किसी तरह अटकना दिखाकर, जारी करने के लिए और रकम जमा कराने को कहते हैं। इसी तरह उनके चंगुल में फंसकर लोग हजारों या लाखों रुपये गंवा रहे हैं।
राज्य में 21 केस
राज्य के दो साइबर थानों में इस साल अब तक इस तरह के 21 केस इस दर्ज किए जा चुके हैं। इन 21 लोगों से ही साइबर ठग करीब 5.20 करोड़ रुपये ठग चुके हैं। राज्य के जिले के थानों में भी इस प्रकार के कई केस रजिस्टर हो रहे हैं। इनमें कुल ठगी की रकम आठ करोड़ से अधिक आंकी जा रही है।
ऐसे संदेशों पर न करें भरोसा : एसएसपी
एसटीएफ के एसएसपी आयुष अग्रवाल ने कहा कि घर बैठे ऑनलाइन कमाई के लिए आने वाले संदेशों पर भरोसा न करें। साइबर ठग इन मैसेजों को भेजते हैं। उन्होंने इस प्रकार के संदेशों से सतर्क रहने की अपील भी की है।
Published on:
30 Nov 2023 10:10 am
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