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लापता हुआ किशोर 37 साल बाद अधेड़ बनकर लौटा, छलक आई प​रिजनों की आंखें

नौकरी खोजने निकला एक किशोर 37 साल बाद बुजुर्ग होकर अचानक घर लौटा तो परिजन आश्चर्यचकित रहे गए। आइए आपको बताते हैं उत्तराखंड के भगत सिंह की पूरी कहानी।

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37 साल से लापता चल रहे भगत सिंह को पाकर मां बेहद खुश है

उत्तराखंड के यूएस नगर के शांतिपुरी नंबर तीन निवासी भगत सिंह किशोरावस्था में पारिवारिक आर्थिक स्थति को लेकर चिंतित रहते थे। आसपास के कई स्थानों पर उन्होंने काम तलाशा था लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी। लिहाजा वर्ष करीब 1986 में जब भगत सिंह 17 साल के थे तब वह एक दिन अचानक नौकरी की तलाश में घर छोड़कर चले गए थे। तमाम खोजबीन के बाद भी उनका कोई सुरा नहीं लगा। घर में मां और अन्य परिजन उम्मीद खो बैठे थे। इस बीच बीते बुधवार को भगत सिंह करीब 37 साल बाद अचानक अपना घर खोजते हुए गांव पहुंच गए तो मां और अन्य परिजन उन्हें पाकर खुशी से गदगद हो गए । ये बात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।

पांच भाइयों में दूसरे नंबर के हैं भगत
महज 17 साल की आयु में भगत सिंह नौकरी खोजने के खातिर घर छोड़ गए चले गए थे। काफी समय तक परिजनों ने उनकी खोजबीन की, लेकिन सुराग नहीं लग पाया। भगत सिंह पांच भाइयों में दूसरे नंबर के भाई है।

भाइयों ने पहचाना
बीते बुधवार रात भगत अपना घर खोजते हुए शांतिपुरी पहुंच गए। बताया जा रहा है कि बड़े भाई भुवन और छोटे भाई चंदन ने उन्हें पहचानते हुए गले लगा लिया था। उसके बाद वह मां, रिश्तेदार और पड़ोसियों से मिले। करीब 37 साल
से गुमशुदा भगत के घर पहुंचने की चर्चाएं दूर तक हैं।

10 साल फैक्ट्रियों में किया काम

घर लौटे भगत ने बताया गया कि उन्होंने नैनीताल, रुद्रपुर, मुरादाबाद, रामपुर, कोटद्वार में बिस्किट फैक्ट्री में 10 साल काम किया। उसके बाद भगत सिंह ने ऋषिकेश में मजदूरी की और सब्जी का ठेला लगाकर जीवन यापन किया। उसके बाद उन्होंने शादी भी कर ली थी।

एक साल पहले भी आए थे गांव
यहां पहुंचने पर भगत ने बताया कि वह हमेशा ही भाइयों और परिजनों के प्रति चिंतित रहते थे। लेकिन वह घर नहीं आ पाए। करीब एक साल पहले भी वह परिजनों से मिलने शांतिपुरी आए थे, लेकिन साढ़े तीन दशक में गांव का नक्शा पूरी तरह बदला हुआ था। इसके कारण वह अपना घर और परिजनों का पता नहीं लगा पाए। उसके बाद वह निराश होकर वापस लौट गए थे।