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उत्तराखंड सरकार ने किया नई पर्यटन नीति का एलान, यह बातें की गई शामिल

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि नई नीति की वैधता जारी होने से पांच साल की अवधि के लिए होगी और प्रत्येक नीति का प्रत्येक 2 वर्ष बाद व्यापक रूप से अध्ययन के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे...

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(देहरादून): उत्तराखंड सरकार ने अपनी नई पर्यटन नीति की घोषणा की है। नई पर्यटन नीति के तहत पर्यटकों को उत्तराखंड आने के लिए आकृष्ट किया जाएगा। साथ ही पर्यटन को विकसित करने के लिए उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में भूमि बैंक तैयार किया जाएगा। राज्य की बहुप्रतीक्षित पर्यटन नीति को कैबिनेट में स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद नई पर्यटन नीति के अंतर्गत पर्यटन क्षेत्र के निवेशकों तथा परियोजना इकाइयों को वे सभी लाभ तथा प्रोत्साहन प्राप्त हो सकेंगे, जो राज्य में अन्य उद्योगों को प्राप्त हैं।


नई नीति के अंतर्गत होटल, रिजॉर्ट, योगा, आरोग्य, स्पा आयुर्वेद तथा प्राकृतिक चिकित्सा रिजॉर्ट, ईको—लांज, रेस्टोरेंट, पार्किंग स्थल, मनोरंजन पार्क, कन्वेंशन केंद्र , त्योहार, साहसिक गतिविधियां , रोप—वे, कैरावन, एयर टैक्सी, हस्तशिल्प, जनरल सफारी, सर्विस अपार्टमेंट आदि कुल 28 पर्यटन गतिविधियों को पात्र इकाई माना गया है।


इस नीति के अंतर्गत राज्य में पर्यटन संबंधी गतिविधियों एवं परियोजनाओं के पंजीकरण तथा प्रोसेसिंग के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद नियामक एवं नोडल संस्था होगी। निजी क्षेत्र की बडी पर्यटन योजनाओं तथा पर्यटन विभाग के भूमि बैंक अथवा वर्तमान परिसम्पतियां के लिए चिन्हित योजनाओं के पंजीकरण तथा शुरूआती प्रोसेसिंग के बाद उन्हें अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च शक्ति अधिकार युक्त समिति को भेजा जाएगा।


राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि इस नीति का मकसद राज्य को सुरक्षित और पर्यटक मित्र गंतव्य के रूप में विकसित एवं मजबूत करना है। इसके अतिरिक्त राज्य में नये पर्यटक गंतव्य स्थलों एवं विशेष पर्यटक उत्पादों को विकसित और पर्यटक गतंव्यों पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि नीति के मूल में समावेशी तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास की भावना निहित है।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि नई नीति की वैधता जारी होने से पांच साल की अवधि के लिए होगी और प्रत्येक नीति का प्रत्येक 2 वर्ष बाद व्यापक रूप से अध्ययन के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति के अनुसार उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद प्रत्येक जनपद में पर्यटन के मकसद के लिए भूमि बैंक तैयार करेगा। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद एक परियोजना प्रबंधन इकाई का भी गठन करेगी।