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पूर्व मंत्री कलराज मिश्र की जगह इस नेता को टिकट देगी बीजेपी, जनसंघ से भी रहा है नाता

  बीजेपी से टिकट की दावेदारी किया जनसंघ के नेता पूर्व मंत्री के सुपुत्र ने
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देवरिया

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 31 Jul 2018, 1:58 PM IST

kalraj mishra

बीजेपी एमपी कलराज मिश्रा

बीजेपी के साथ ही लोकसभा चुनाव लड़ने वाले संभावित प्रत्याशी भी पूरे चुनावी मोड में आ चुके हैं। पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल में सबसे दावेदारी बीजेपी के दिग्गज नेता कलराज मिश्र की सीट को लेकर है। कई दिग्गज नेता कलराज मिश्र की सीट से अपनी प्रत्याशिता सुनिश्चित कराने में जुटे हुए हैं। कुछ ने तो जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। हालांकि, पुराने जनसंघी और पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र के सुपुत्र की दावेदारी ने भी कईयों की नींद उड़ा दी है।
गोरखपुर मंडल का देवरिया लोकसभा सीट अतिमहत्वपूर्ण सीटों में शामिल रहा है। इस सीट से कई दिग्गज चुनाव जीतकर संसद में पहुंच चुके हैं। बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दिग्गज नेता कलराज मिश्र को यहां से उतार कर सबको चैका दिया था। हालांकि, कलराज मिश्र को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर काफी विरोध भी हुआ था लेकिन बाद में सबकुछ सही हो गया था। पुराने कार्यकर्ता पूरे तनमन से जुटे और कलराज मिश्र रिकार्ड मतों से विजयी हुए।
केंद्र में जब बीजेपी की सरकार बनी तो कलराज मिश्र को मंत्रीमंडल में जगह मिली। हालांकि, बढ़ती उम्र की वजह से कुछ ही सालों में उनको मंत्रीमंडल से बाहर कर दिया गया।
इस बार देवरिया लोकसभा सीट से कलराज मिश्र चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं। ऐसे में दर्जनों दावेदार इस सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

पुराने दिग्गज दुर्गा प्रसाद मिश्र के सुपुत्र ने भी की दावेदारी

जनसंघ के पुराने दिग्गज पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र के सुपुत्र दीपक मिश्र उर्फ शाका ने भी देवरिया लोकसभा सीट के लिए बीजेपी की टिकट की दावेदारी की है। स्वर्गीय दुर्गा प्रसाद मिश्र जनसंघ के दिग्गज नेताओं में रहे हैं। बरहज से कई बार विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके दुर्गा प्रसाद मिश्र की गिनती बीजेपी के बड़े नेताओं में होती रही है। वह देवरिया के बरहज से निर्दल चुनाव लड़कर भी विधायक बने थे। उनके निधन के बाद बड़े सुपुत्र दीपक मिश्र उर्फ शाका ने उनकी राजनैतिक विरासत संभाली है। ब्लाॅक प्रमुख रह चुके शाका ने पिछले विधानसभा चुनाव में बरहज से टिकट के लिए दावेदारी किए थे। टिकट कटने के बाद बगावत की नौबत आ गई थी लेकिन शीर्श नेतृत्व ने उनको ऐसा करने से रोका। इसके बाद से वह संगठन और क्षेत्र में बने रहे। लोकसभा की टिकट के लिए मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। पिता की विरासत संभाल रहे इस नेता के मैदान में उतरने की दावेदारी से कई दावेदारों का दावा फीका पड़ने लगा है।