
कांशीराम आवास
देवरिया. बसपा शासन काल का ड्रीम प्रोजेक्ट मान्यवर कांशीराम शहरी आवास योजना प्रशासनिक कुव्यवस्था के कारण दम तोड़ता नजर आ रहा है । योजना में बनाए गए आवासीय भवन सात साल में ही जर्जर हो गए हैं । मकान के प्लास्टर जहां उखड़ते जा रहे हैं वहीं नालियों का गंदा पानी नीचे के तल में बहने से लोगों को परेशानी हो रही है। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। परिसर में फैली गंदगी स्वच्छता अभियान की पोल खोल रही है । नगरपालिका और विकास विभाग अपनी जिम्मेदारियों से भागता नजर आ रहा है।
बताते चलें कि नगरीय क्षेत्र के मेहड़ापुरवा स्थित कांशीराम आवासीय परिसर में हर तरफ समस्या साफ दिखाई पड़ रही हैं। खुले आसमान तले गुजर-बसर कर रहे गरीबों को बसपा सरकार ने वर्ष 2011 में कांशीराम शहरी आवास योजना के माध्यम से पक्का घर आवंटित किया था । इस कॉलोनी में 168 गरीब व असहाय लोगों को आवास दिए गए। बिजली, पानी, स्कूल और बच्चों के खेलने आदि सभी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा गया था।
वर्तमान में इन आवासों के हालात काफी दयनीय है । छतों के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं। मरम्मत तो दूर इन आवासीय भवनों की रंगाई-पुताई भी नहीं हुई। स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए बनाई गई टंकी भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ गयी है क्योंकि उसका आज तक इस्तेमाल ही नहीं हो सका है। लाख स्कूल चलो का ढिंढोरा पीटा जा रहा है लेकिन शहर में रहकर भी इस गरीब बस्ती के 80 फीसदी बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
आवासीय परिसर में रहने वाले लोग बताते हैं कि आवास आवंटन के चंद दिनों बाद ही विभागीय भ्रष्टाचार के कारण सभी सुविधाएं धूल फांकने लगीं थी। कुछ ही दिनों में वायरिंग में फाल्ट की समस्या आने लगी। पानी की टंकी शोपीस बनकर रह गई। परिसर में बच्चों को खेलने के लिए बनाए गए झूले, खिलौने टूट चुके हैं। स्वामीनाथ का कहना है कि बसपा सरकार ने गरीबों को आवास नहीं झुनझुना थमाया था। नजदीक से ट्रेन गुजरने से उसके कंपन के चलते छतों के टुकड़े गिरते हैं। शौकत अली ने बताया कि आवास निर्माण के बाद किसी सरकार ने कॉलोनी की समस्या पर ध्यान नहीं दिया।
काशी का कहना था कि कॉलोनी का माहौल खराब हो गया है। शहर में रहकर भी यहां के लोग शहर के रहन-सहन से वाकिफ नहीं हो पा रहे हैं।युवा मोहित बताते हैं कि यहां रह रहे परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी है इसके लिए सरकारी तौर पर कुछ प्रयास होना जरूरी है।
कांशीराम शहरी आवास में नया कुछ शुरु हुआ है तो वो है जुआ । सुबह शुरू हुआ जुआ देर शाम तक प्रतिदिन चलता है। जीतने वाला गिरोह रात में दारू पीकर जश्न मनाता है। पानी की टंकी पर जश्न की नुमाइश भी होती है। सभी जानते हैं लेकिन पुलिस आती है और कुछ देर बाद अपना 'काम' करके वापस लौट जाती है।
इस संबंध में सीडीओ राजेश त्यागी ने कहा कि कांशीराम शहरी आवास के रख-रखाव की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। इसकी मरम्मत की देखरेख का जिम्मा उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता। उधर नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि नगरपालिका अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए कांशीराम शहरी आवास धारकों को सफाई और पेयजल सुविधा मुहैया करा रही है। भवन के रख-रखाव का जिम्मा उनके विभाग का नहीं है।
by Surya Prakash Rai
Published on:
04 Mar 2018 11:46 pm
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