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UP Crime: 10 बीघा खेत, 7 साल का विवाद…और पूरा परिवार तबाह, तमाशा देखते रहे लोग

Deoria Murder Case: यूपी के देवरिया में पिछले 7 साल से चल रहे 10 बीघा जमीन के चलते पूरा परिवार तबाह हो गया। यहां हमलावरों ने घर में घुसकर गोलियों और धारदार हथियार से 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। जबकि एक बच्चा जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। आइए बताते हैं पूरा मामला...

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Deoria Murder Case; dispute regarding 10 bighas land was going on 7 years

देवरिया में 6 लोगों की हत्‍या के बाद फैली सनसनी।

Deoria Murder Case: पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सोमवार को बड़ा नरसंहार किया गया। इस नर संहार के बाद आसपास के गांवों में तनावपूर्ण हालात हैं। अधिकारियों ने एहतियातन यहां भारी पुलिस फोर्स के साथ पीएसी को तैनात किया है। वहीं दो हत्यारों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि अन्य हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित की गई है। देवरिया के एसपी डॉ. संकल्प शर्मा का कहना है कि जल्द ही हमलावरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर इतनी ही तेजी दिखाती तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। कहीं न कहीं पुलिस के खिलाफ भी ग्रामीणों में गुस्सा है। पूरा गांव दो गुटों में बंट गया है। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है। जबकि‌ परिवार का आखिरी बच्चा गोरखपुर में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि फतेहपुर गांव का रहने वाला प्रेम यादव राजनीति में सक्रिय रहने के साथ जमीन की खरीद फरोख्त भी करता था। प्रेम यादव ने गांव में कई लोगों की जमीनें खरीदी थीं। दूसरी परिवार समेत जान गंवाने वाले सत्य प्रकाश का एक भाई साधु दुबे मानसिक रूप से कमजोर है। सात साल पहले प्रेम यादव ने साधु दुबे से 10 बीघा जमीन का टुकड़ा अपने नाम ‌लिखवा लिया था। सत्य प्रकाश ने इसका विरोध किया था। इसको लेकर सात साल पहले गांव में पंचायत भी हुई थी। इसमें सत्य प्रकाश ने बताया था कि उसके भाई की मानसिक हालत ठीक नहीं है। ऐसे में वह जमीन बेचने लायक नहीं है। गांव वालों की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने आपस में समझौता भी कर लिया था। रविवार को सत्य प्रकाश दुबे उसी खेत के टुकड़े पर फसल काटने पहुंचे थे। जहां प्रेमचंद यादव ने इसका विरोध कर दिया।


ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को प्रेमचंद और सत्यप्रकाश के बीच विवाद होने के बाद सोमवार को प्रेम चंद का शव सत्यप्रकाश के उसी खेत के पास मिला। इसकी सूचना फैलते ही प्रेमचंद पक्ष का पारा चढ़ गया। इसके बाद वे लोग हाथों में हथियार और असलाह लेकर सत्यप्रकाश के घर की ओर बढ़ गए। ग्रामीण बताते हैं कि सत्यप्रकाश ने प्रेमचंद की हत्या नहीं की, ग्रामीणों का तर्क है कि अगर सत्य प्रकाश प्रेमचंद की हत्या करता तो वह घर में नहीं होता। हत्या करने के बाद परिवार समेत गांव से फरार हो गया होता, लेकिन सत्य प्रकाश का घर में उसके बेगुनाह होने का सुबूत देता है। फिर भी प्रेमचंद पक्ष के लोगों ने उसके घर में घुसकर उसका पूरा परिवार तबाह कर दिया।


ग्रामीणों ने बताया कि हमलावरों की संख्या ज्यादा थी। इसके साथ उनके सिर पर खून सवार था। वे लोग मार काट करते हुए असलाह लहराकर ग्रामीणों को सामने नहीं आने की धमकी दे रहे थे। इसके चलते वे लोग सत्य प्रकाश के परिवार को बचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।


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