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देवरिया नरसंहार में कई आरोपियों के घर गिरना तय, भू-अधिनियम की धारा 67 से बचना मुश्किल, जानें तहसीलदार के अधिकार

Deoria Murder Case: यूपी के देवरिया जिले में 2 अक्टूबर को हुए सामूहिक नरसंहार के आरोपियों के घरों पर जल्द ही बुलडोजर चलेगा। इन सभी पर भू-अधिनियम 67 के तहत कार्रवाई की गई है। आइए जानते हैं भू-अधिनियम 67 क्या है, कौन लोग इसकी जद में आते हैं?

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Houses of accused in Deoria murder case will collapse What is Land Act Section 67?

देवरिया में सामूहिक हत्याकांड के आरोपी मृतक प्रेमचंद्र यादव का मकान सरकारी जमीन पर बना है।

Deoria Murder Case Update: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में रुद्रपुर तहसील के गांव फतेहपुर में दो अक्टूबर को जमीन के विवाद को लेकर भीषण नरसंहार हुआ था। इसमें एक पक्ष से एक जबकि दूसरे पक्ष से पति-पत्नी समेत परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। वहीं इस हत्याकांड का शिकार हुए प्रेमचंद्र यादव पर जबरन जमीन कब्जाने का आरोप लगा था। इसके बाद प्रशासन ने विवादित जमीन की पैमाइश कराई थी। घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या में शामिल आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया था। इसके तहत प्रशासन ने हत्यारोपी प्रेमचंद्र यादव के कब्जे वाली जमीनों की भी जांच की थी। इसमें खुलासा हुआ कि प्रेमचंद्र यादव और उनके करीबियों ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया है। इन लोगों के मकान वन विभाग और जीएस यानी ग्राम समाज की जमीन पर बने पाए गए।

15 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी हुए सस्पेंड
सीएम की सख्ती के बाद शासन ने आनन-फानन में विवाद के दरम्यान दोषी पाए गए 15 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद प्रेमचंद यादव के मकान पर बुलडोजर चलना तय माना जा रहा था। हालांकि इस मामले में तहसील प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रेमचंद्र यादव के मकान पर भू-अधिनियम की धारा 67 के तहत नोटिस चस्पा कर जवाब मांगा था। इसके बाद तहसील प्रशासन ने 9 अक्टूबर को मौके पर पहुंचकर वहीं फैसला सुनाने का आदेश दिया था।

आदेश के तहत जब 9 अक्टूबर को तहसील की टीम गांव पहुंची तो तमाम लोगों ने इसका विरोध किया। हालांकि तहसील की टीम ने विरोध के बावजूद जमीन की दोबारा पैमाइश की इस दौरान प्रेमचंद्र यादव का मकान सरकारी जमीन पर बना पाया गया। इसपर तहसील प्रशासन ने प्रेमचंद्र यादव, उनके पिता राम भवन यादव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मौके पर ही बेदखली का आदेश जारी किया। इसके बाद आरोपियों के परिजनों को मकान खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया है।

इसके बाद प्रेमचंद्र यादव पक्ष के वकील गोपीनाथ ने डीएम कोर्ट में अपील दायर करने की बात कही है। उनका कहना है कि तहसील प्रशासन ने 30 दिन का समय दिया है। यदि इससे पहले मकान गिराया जाता है तो आदेश की अवहेलना होगी। दूसरी ओर नरसंहार में जिंदा बजे सत्यप्रकाश दुबे के बेटे देवेश ने ऐलान किया है कि 13 अक्टूबर को सत्यप्रकाश दुबे का श्राद्ध है। हमारे परिवार के पांच लोगों की नृशंस तरीके से हत्या की गई है। अगर 13 अक्टूबर से पहले प्रेमचंद्र यादव समेत सभी आरोपियों के घर नहीं गिराए गए तो हम श्राद्ध नहीं मनाएंगे। इसके लिए तहसील प्रशासन जिम्मेदार होगा। इसके बाद यह मामला और गरमा गया है।

जानते हैं क्या होती है भू-अधिनियम की धारा 67?
लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन शर्मा के अनुसार भू-अधिनियम 2006 की धारा की 67 के तहत किसी भी रूप में सरकारी संपत्ति पर कब्जा, अतिक्रमण रोकने का पहला अधिकार राजस्व निरीक्षक यानी क्षेत्रीय लेखपाल के पास सुरक्षित है। लेखपाल अवैध कब्जा रोकने के लिए की गई कार्रवाई को फॉर्म 67 में दर्ज करता है। इसके बाद इसे तहसीलदार कोर्ट में जमा कराया जाता है। यानी राजस्व अधिनियम की इस धारा के तहत सरकारी जमीनों के संरक्षण और अवैध कब्जा हटाने के अधिकार को सुरक्षित किया गया है।

साल 2017 में तहसीलदार कोर्ट को इसपर निर्णय लेने का पूरा अधिकार दिया गया। इसके पहले सरकारी जमीन से बेदखली का आदेश जारी करने का अधिकारी सिर्फ डीएम या एडीएम कोर्ट के पास होता था। सरकारी जमीन, तालाब, पोखर, चारागाह आदि पर अवैध हटाने के लिए इस धारा का उपयोग किया जाता है। इसमें पहले कब्जाधारी को स्वतः कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया जाता है। नोटिस जारी करने के 14 दिनों के भीतर अगर कब्जाधारी कब्जा नहीं हटाता है तो तहसीलदार लेखपाल को पुलिस फोर्स की मौजूदगी में कब्जा ध्वस्त कराने का आदेश देते हैं। इसकी फोटो और वीडियोग्राफी दोनों कराया जाना अनिवार्य किया गया है। इस दौरान कब्जा हटाने में खर्च हुई रकम की भरपाई भी कब्जाधारी से कराई जाती है। रकम नहीं देने पर जेल भी हो सकती है।