
CM Yogi
पूर्वांचल में लोकसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। सत्ताधारी दल के सिंबल पर टिकट मांगने वालों की लंबी फेहरिश्त है। टिकट के चक्कर में पद और रसूख का भी जोरदार प्रयोग किया जा रहा। इन हथकंड़ों को अपनाकर पहले अपनों को ही किनारे लगाने का खेल जारी है। सबसे अधिक खेल देवरिया और कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र में सामने आ रही है। बीजेपी कई खेमों में बंटी दिख रही। लोकसभा चुनाव में टिकट की आस रखने वाले नेता अपना टेंपो हाई करने के लिए दूसरे पक्ष पर वार करने से नहीं चूक रहे।
देवरिया संसदीय क्षेत्र पूर्व काबीना मंत्री कलराज मिश्र का संसदीय क्षेत्र हैं। इस बार कलराज मिश्र रिकार्ड मतों से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन विधानसभा चुनाव में उन पर टिकट बंटवारे में हस्तक्षेप कर कई चहेतों को टिकट दिलाने व कई प्रमुख कार्यकर्ताओं के टिकट कटवाने का भी आरोप लगा था। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद कलराज मिश्र की बढ़ती उम्र की वजह से मंत्रीमंडल से बाहर होना पड़ा। कयास यह भी लगाए जाने लगे कि वह संसदीय चुनाव में भी नहीं उतरेंगे। ऐसे में इस सीट पर चुनाव लड़ने की इच्छा वालों की लंबी कतार है।
सभी संभावित दावेदार टिकट के लिए जुगत लगाने के साथ ही अपने विरोधी दावेदारों को ‘ठीक‘ करने में भी जुटे हुए हैं। पार्टी सीधे तौर पर कई धु्रवों में बंटी हुई दिख रही। अभी ताजा मामला देवरिया संसदीय क्षेत्र और कुशीनगर जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी के तबादले को लेकर है। बीजेपी इस पूरे प्रकरण में दो फांक में दिख रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि एक पूर्व मंत्री, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री और बीजेपी के कई बड़े नेता एक शराब माफिया के पक्ष में प्रशासनिक अफसर का ट्रांसफर करवा दिए हैं। बताया जा रहा कि शराब माफिया बिहार की शराबबंदी का फायदा उठाकर बार्डर एरिया में खुलेआम शराब की तस्करी करा रहा था। आरोप है कि इसको बीजेपी के ही एक गुट का संरक्षणप्राप्त है।
बीजेपी का एक गुट जो प्रशासनिक अफसर के साथ खड़ा है वह आरोप लगा रहा कि अफसर ने शराब माफिया पर कार्रवाई की इसलिए बीजेपी के कुछ लोग आयातित नेताओं के कहने पर उनका ट्रांसफर करा दिए हैं।
फिलहाल, अफसर का ट्रांसफर हो चुका है। एक पक्ष जश्न मना रहा और दूसरा पक्ष ट्रांसफर रूकवाने में जुटा हुआ है। बताया यह जा रहा है मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच चुका है। दोनों पक्ष अपना-अपना तर्क देने में जुटा हुआ है।
दरअसल, इस पूरे प्रकरण के अंदरखाने की बात बीजेपी के नेता बताते हैं। उन्होंने बताया कि यह वर्चस्व की लड़ाई असल में लोकसभा चुनाव की तैयारी है। दोनों पक्ष देवरिया लोकसभा क्षेत्र के टिकट के दावेदारों से डील हो रहा है। चुनाव की बिसात बिछाकर सब अपनी-अपनी गोटी फिट करने में लगे हैं तो दूसरे दावेदारों को कमजोर करने में।
बहरहाल, बीजेपी पूर्वांचल में चुनाव के पहले अपने आंतरिक वर्चस्व की लड़ाई में व्यस्त है। जबकि पीएम मोदी से लेकर योगी तक अधिक से अधिक सीटों को जीताने के लिए यूपी में पसीना बहा रहे।
Published on:
03 Aug 2018 03:03 pm
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