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देवास. विवाद और विरोध का पर्याय बन चुके नगर निगम में सोमवार को जमकर बवाल हुआ। टारगेट पर थे महापौर और हंगामा करने वाले थे कांग्रेसी। पहले तो कांग्रेसियों ने शहर में रैली निकाली। नारेबाजी की। फिर नगर निगम पहुंचे। महापौर कक्ष के बाहर हंगामा किया। महापौर कक्ष की नेमप्लेट को जूते मारे। नेमप्लेट उखाडक़र पैरों तले रौंदी। दरवाजे के कांच फोड़े। कुर्सियां तोड़ी। महापौर को भ्रष्ट बताया और कहा कि ९० के दशक में नौकरी की तलाश में देवास आने वाला व्यक्ति किस तरह महापौर तक पहुंचा और भ्रष्टाचार से अकूत संपत्ति बना ली। महापौर सुभाष शर्मा ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कांग्रेसी घटियापन पर उतर आए हैं।
दरअसल सोमवार सुबह करीब ११ बजे कांग्रेसजन जवाहर चौक स्थित कांग्रेस कार्यालय पर एकत्र होना शुरू हुए। यहां से रैली के रूप में शहर में निकले। विरोध प्रदर्शन यूथ कांग्रेस के बैनर तले किया गया जिसमें कांग्रेस नेता शामिल हुए। नारेबाजी करते हुए तहसील चौराहे से टर्न लेकर नगर निगम की ओर मुड़े। कांग्रेसियों के प्रदर्शन के कारण पुलिस ने नगर निगम के सामने कट पॉइंट पर रखे बैरिकेड्स हटाए और कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए निगम परिसर में दाखिल हुए। कुछ नीचे खड़े रहकर भाषण देते रहे तो कुछ ऊपरी मंजिल पर महापौर कक्ष के सामने विरोध करते रहे। करीब घंटेभर तक हंगामा चलता रहा। प्रदर्शन में युकां अध्यक्ष हिमत सिंह चावड़ा, जितेंद्र सिंह गौड़, दिग्विजय सिंह झाला, विश्वजीत सिंह चौहान सहित पूर्व महापौर रेखा वर्मा, जयप्रकाश शास्त्री, एम. असलम शेख, सुधीर शर्मा, अजीत भल्ला, जितेंद्रसिंह मोंटू, गुरुचरण सलूजा, राहुल पंवार, रोहित शर्मा, अनिल गोस्वामी, इितयाज शेख भल्लू, दीपेश कानूनगो, चंद्रपालसिंह सोलंकी, मलखानसिंह देवड़ा, धीरज कल्याणे, शबाना सोहेल, ज्योति चितले, वर्षा निगम, हफीज घोसी, राकेश शर्मा, हर्षप्रतापसिंह गौड़, यशवंत कुशवाह सहित बड़ी संया में युवा कांग्रेस एंव कांग्रेसजन उपस्थित थे। आभार रियाज नागोरी एवं अक्षय बाली ने माना।
पहले जूतों से पीटा फिर तोड़ दी नेमप्लेट
युकां व कांग्रेस नेता महापौर सुभाष शर्मा के कक्ष के बाहर नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान कई नेताओं ने आपा खो दिया। महापौर के खिलाफ नारेबाजी करते करते कांग्रेसी तोडफ़ोड़ पर उतर आए। पहले तो महापौर कक्ष के बाहर लगी नेमप्लेट को जूते मारे। इसके बाद नेमप्लेट उखाड़ी। एक नेमप्लेट नीचे पटककर पैरों तले रौंद दी। इतने से भी मन नहीं भरा तो पास में रखी कुॢसयों को तोड़ा गया। काफी देर तक यह सब चलता रहा। इसके बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी और नेता प्रतिपक्ष विक्रम पटेल ने मौजूद कांग्रेसियों को टोका। गुस्सा जताते हुए कहा कि ये क्या कर रहे हो। ये ठीक नहीं है लेकिन नेताओं ने टोकने में देर कर दी और तब तक कांग्रेसी अनुशासनहीनता और उद्दंडता की हदें पार कर चुके थे। बाद में महापौर कक्ष के सामने ही सभी धरने पर बैठ गए।
बात महापौर के घेराव की थी फिर कक्ष क्यों घेरा
तोडफ़ोड़ और नारेबाजी के बाद कांग्रेस नेताओं ने महापौर कक्ष के दरवाजे पर ज्ञापन चस्पा किया। इसके बाद कक्ष के दरवाजे पर ताला लगा दिया। हालांकि चर्चा हुई कि बातेें तो महापौर के घेराव की हुई थी फिर कांग्रेसियों ने उनके कक्ष को क्यों घेरा। कुछ कांग्रेसियों ने दबी जुबान कहा कि यह सब मिलीजुली सरकार है। महापौर को घेरना ही होता तो उनके घर चले जाते। कुछ नेताओं को महापौर चुनाव लडऩा है इसलिए कक्ष का घेराव कर खुद को शहर हितैषी बताने में जुटे हैं।
कैसे बन गए इतनी संपत्ति के मालिक
महापौर कक्ष के बाहर हंगामा करने के बाद कांग्रेसी नीचे आए। यहां प्रदेश कांग्रेस महामंत्री शौकत हुसैन, शहर अध्यक्ष मनोज राजानी, पूर्व महापौर जयसिंह ठाकुर, वरिष्ठ नेता भगवान सिंह चावड़ा ने भाषण दिए। अपने भाषणों में कांग्रेस नेताओं ने महापौर शर्मा पर तीखे हमले किए। पूर्व महापौर ठाकुर ने कहा कि मेरे कार्यकाल में निर्दलीय पार्षद बनकर गिड़गिड़ाने वाले सुभाष शर्मा आज इतनी संपत्ति के मालिक कैसे हो गए। इनकी जांच होनी चाहिए। पानी, मुरम सबके बिलों की जांच होनी चाहिए। चावड़ा ने राज परिवार पर निशाना साधते हुए महापौर को घेरा और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
महापौर जी, तुहारा राजनीतिक भविष्य कुछ नहीं है...
शहर अध्यक्ष मनोज राजानी ने कहा कि महापौर जी देवास की जनता पूछना चाहती है कि १७९ करोड़ की देनदारियां कैसे हो गई। इसकी जांच होनी चाहिए। महापौर कह रहे हैं कि मेरे कार्यकाल की नहीं है तो आपके कार्यकाल की जांच तो अभी बाकी है। धीरे-धीरे देखो, होता है क्या-क्या। भ्रष्टाचार करने वालों को बशा नहीं जाएगा। जेल की हवा खाएंगे सब। महापौरजी आपके कौन-कौन से पार्षद पार्टनरशिप में काम करते हैं ये सब जानकारी मिल गई है। झांझ-मंजीरे बजाने वाले अब पांच साल यही करना है। फर्जी बिलों के पैसे बकाया हैं तो कमिश्नर पर दबाव बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भी जवाहर चौक की सभा में कहा था कि सुभाष, भ्रष्टाचार तो नहीं करोगे। मोदी के नाम पर जीत तो गए लेकिन तुहारा राजनीति भविष्य कुछ नहीं है। भाजपा की मानसिकता गुलामी की है।
पहले खुद की जांच करवा लें आरोप लगाने वाले
इस मामले में महापौर सुभाष शर्मा ने कहा कि जो कुछ भी कांग्रेसियों ने किया मैं उसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। झूठे आरोप लगा रहे हैं। यदि सत्यता है तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, जांच करवा लीजिए। जनता की प्रॉपर्टी को कांग्रेस ने नुकसान पहुंचाया है। मैंने सचिवालय से आयुक्त को रिपोर्ट भेजी है। आरोप लगाने वाले मनोज राजानी, जयसिंह ठाकुर पहले खुद की जांच करवा लें, पता चल जाएगा कि किसने कैसे संपत्ति बनाई। कांग्रेसी घटियापन पर उतर आए हैं। चुनाव को देखते हुए नौटंकी कर रहे हैं। जब लिखित शिकायत सीएम से कर चुके हैं तो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की क्या जरुरत थी।
एडिशनल कमिश्नर करेंगे जांच
निगमायुक्त संजना जैन ने कहा कि महापौर से बात हुई थी। मैंने एडिशनल कमिश्नर को घटनाक्रम की जांच के निर्देश दिए हैं। वे रिपोर्ट बनाकर देंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी।
आंकड़ों में उलझ गए कांग्रेसी
कांग्रेसजनों ने प्रदर्शन तो लाव-लश्कर के साथ किया लेकिन आंकड़ों में गड़बड़ कर दी। कांग्रेस द्वारा जो प्रेसनोट जारी किया गया उसमें देनदारियां १९७ करोड़ लिखी है जबकि शहर कांग्रेस अध्यक्ष १७९ करोड़ रुपए की देनदारियां बता रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेसी ही एकमत नहीं हैं कि राशि कितनी है।
तोडफ़ोड़ से मुंह चुरा रहे निगम अधिकारी
मामले में निगम प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब कांग्रेसी हंगामा कर रहे थे, तोडफ़ोड़ कर रहे थे उस समय निगम अधिकारी-कर्मचारी खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। इतना कुछ होने के बाद भी यह कहा जा रहा है कि तोडफ़ोड़ हुई है या नहीं इसकी जानकारी नहीं है जबकि घटनाक्रम के फोटो-वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि किस तरह नेमप्लेट तोड़ी, दरवाजे का कांच फोड़ा, कुर्सियां तोड़ी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के दबाव में काम करने वाले निगम अफसर कांग्रेस नेताओं से बैर मोल लेना नहीं चाहते, जिस कारण जांच में मामला उलझा दिया गया है।
Published on:
06 Aug 2019 11:40 am
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