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देवास एसडीएम पर लोकायुक्त में केस दर्ज, कलेक्टर ने हटाया, अब राव नए एसडीएम

-सिटी बसों की सब्सिडी के दुरुपयोग, मनमाने रूट बदलाव व अन्य गड़बड़ी पर एसडीएम सहित तीन अन्य पर हुई थी कार्रवाई-शिकायत की जांच के बाद लोकायुक्त उज्जैन ने धोखाधड़ी, षडय़ंत्र, अमानत मेंं खयानत, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किया केस दर्ज

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देवास एसडीएम पर लोकायुक्त में केस दर्ज, कलेक्टर ने हटाया, अब राव नए एसडीएम

देवास एसडीएम पर लोकायुक्त में केस दर्ज, कलेक्टर ने हटाया, अब राव नए एसडीएम

देवास. सिटी बसों के संचालन के दौरान सब्सिडी के दुरुपयोग, बसों के मनमाने रूट बदलाव सहित अन्य गड़बडिय़ों के मामले मेंं देवास एसडीएम व देवास सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के तत्कालीन सीईओ प्रदीप सोनी, तत्कालीन चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) नगर निगम सूर्यप्रकाश तिवारी, विश्वास ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर विजय गोस्वामी, प्रणय गोस्वामी के खिलाफ लोकायुक्त उज्जैन ने शिकायत की जांच के बाद धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, षडय़ंत्र की धाराओं में केस दर्ज किया है। उधर इसके अगले ही दिन कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने एसडीएम सोनी को एसडीएम पद से हटा दिया, उनकी जगह टी प्रतीक राव को एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मामले में लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक उज्जैन अनिल विश्वकर्मा को जनवरी 2023 में शिकायत की गई थी। इसमेंं उल्लेख था कि नगर निगम देवास के माध्यम से यात्री बसों के टेंडर अमृत योजना के अंतर्गत निकाले गए थे, इसमें शासन की ओर से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान था। ननि द्वारा देवास विश्वास ट्रांसपोर्ट प्रा.लि. के यात्री बसों का टेंडर स्वीकृत कर निर्धारित मार्गों पर संचालन की अनुमति दी गई थी लेकिन विश्वास ट्रांसपोर्ट द्वारा अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर मेंं स्वीकृत माग से भिन्न मार्गों पर यात्री बसों का संचालन किया जाने लगा, कुछ बसों का सौदा भी कर दिया गया। इस मामले की जांच डीएसपी सुनीलकुमार तालान को सौंपी गई थी।
तीन बसें बेच दी, एक साल बाद भी बसें खरीदकर नहीं लगाई
जांच के दौरान पता चला कि विश्वास ट्रांसपोर्ट को कुल 39 बसों का संचालन सात वर्ष तक योजना के तहत किया जाना था। इसके लिए बसें खरीदने पर कुल लागत की 34.2 प्रतिशत से 39.78 प्रतिशत तक सब्सिडी प्राप्त हुई। विश्वास ट्रांसपोर्ट द्वारा 2022 में तीन बसें बेच दी गई, एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी तीन बसें क्रय कर नहीं लगाई गई। अनेक बसों का मार्ग परिवर्तन सीईओ व सीओओ से अनुमति लेकर कर दिया जबकि वे अनुमति देने के लिए सक्षम ही नहीं थे।
परमिट नहीं मिलने की बात कर व्यस्त रूटों पर संचालन
विजयागंज मंडी मार्ग सहित अन्य रूटों पर परमिट नहीं मिलने की बात करके देवास-उज्जैन व अन्य व्यस्त रूटों पर बसों का संचालन शुरू कर दिया गया। ये नियम विरुद्ध था। बसों के लिए मासिक पास भी जारी नहीं किए गए, बसों पर विज्ञापन का टेंडर भी जारी नहीं हुआ, स्पेअर बस को पिकनिक, टूर आदि का परमिट लेकर चलाया गया।
वर्जन
मामले में धर्मेंद्र चौहान द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को की गई शिकायत की जांच के बाद चार आरोपियों पर गुरुवार को केस दर्ज किया गया है। टेंडर में गड़बड़ी को लेकर भी जांच की जा रही है।
-सुनील कुमार तालान, डीएसपी लोकायुक्त उज्जैन।

अनुमति के बिना दूसरे ऑपरेटर का नाम लिखा, चिन्ह हटाए
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ बसों पर बिना अनुमति के दूसरे ऑपरेटर का नाम लेख करा दिया गया व शासन की योजना के संंबंधित चिन्ह भी हटा दिए गए जो नियमों के विपरीत था।
23.86 लाख की सब्सिडी का एक साल से दुरुपयोग
जिन तीन बसों का सौदा कर दिया गया उन पर दी गई सब्सिडी 23.86 लाख रुपए का दुरुपयोग विगत एक साल से किया जा रहा है। हालांकि बस ऑपरेटर द्वारा बताया गया कि बैंक में सिविल खराब होने से उसे लोन नहीं मिल रहा जिससे बसें नहीं खरीद पा रहा।