
नेमावर-खातेगांव. नंबर प्लेट के आगे बड़े-बड़े अक्षरों में पार्षद, पीछे भाजपा का चुनाव चिह्न कमल का फूल और ऊपर लिखा बाबा और वाहन के अंदर भरी थी शराब की खेप। इस खेप को पुलिस ने पकड़ लिया। देर तक पुलिस पर गाड़ी छोडऩे के तमाम नेताओं के फोन घनघानते रहे, मीडियाकर्मियों को कोतवाली से दूर जाने की सलाह दी जाती रही, लेकिन नवागत टीआई ने बिना दबाव शराब व वाहन जब्त किया। अब उस नेता की जानकारी जुटाई जा रही है, जो यह खेप मुख्यमंत्री द्वारा नर्मदा तट में शराब बंदी के बावजूद उतार रहा था। वहीं गाड़ी चापड़ा के अभिषेक नाहर के नाम से दर्ज है। नाहर का कहना है कि उसने यह गाड़ी पार्षद अखिलेश पुरी पिता कैलाश पुरी को डेढ़ महीने पहले बेच दी है। इसकी लिखा-पढ़ी उसके पास मौजूद है, जिसे वह पुलिस को पेश कर देगा।
कमल का फूल लगाकर फेर रहे सीएम की मंशा पर पानी
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा पट्टी के पांच किमी एरिया में शराब पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन सत्ता से जुड़े लोग ही सीएम की मंशा पर पानी फेर रहे हंै। बताया जाता है सत्ता की आड़ में महीनों से शराब का यह खेल चल रहा था। पुलिस ने जब कार्रवाई की तो सत्ता पक्ष की ओर से गाड़ी छोडऩे का जबरदस्त दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं गाड़ी में भरी शराब की खेप के फोटो और वीडियो बनाने वाले मीडियाकर्मियों को भी घर चले जाने की सलाह दी गई, लेकिन मीडियाकर्मियों ने पूरा मामला कैमरों में कैद कर लिया।
स्कार्पियो कार में मिली पेटियां
दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी, गुर्जर धर्मशाला के सामने एक काले रंग की स्कार्पियो कार खड़ी है, उसमें शराब है। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वाहन के पास कोई नहीं था। सूचना पुख्ता होने के कारण वाहन की तलाशी ली तो वाहन से देशी-विदेशी शराब की ९ पेटियां मिली। इसकी कीमत 22 हजार 750 रु बताई जा रही है। वाहन के आगे बड़े-बड़े अक्षरों में पार्षद और पीछे कमल का फूल बना हुआ था।
"मैं खुद अवैध शराब के खिलाफ हूं। शराब ठेकेदार के खिलाफआवाज उठाई है। मेरी गाड़ी का लॉक टूटा हुआ था और पिछले गेट से किसी ने फंसाने के लिए शराब रख दी। मैं तो खुद शहर का प्रतिष्ठित व्यापारी हूं। मेरे मोहल्ले के लोगों ने शराब रखते हुए देखा था।"
-पप्पू उर्फ अखिलेश पुरी, पार्षद
"एक महीने पहले मैंने गाड़ी पप्पू पार्षद को गाड़ी बेच दी है। इसकी लिखा-पढ़ी मेरे पास मौजूद है। एनओसी नहीं आने के कारण गाड़ी पार्षद को ट्रांसफर नहीं हो पाई थी। एनओसी मिल गई, एक-दो दिन में गाड़ी ट्रांसफर पार्षद के नाम होने वाली थी। मैं थाने में सारे दस्तावेज जमा करा दूंगा।"
-कमलेश नाहर, गाड़ी मालिक
"वाहन स्वामी का नाम कमलेश नाहर आ रहा है। नाहर से जब पूछा तो उसका कहना था कि वाहन उसने पप्पू पार्षद को बेच दिया है। नाहर से दस्तावेज मंगाए हैं। दस्तावेज आने और जांच के बाद जिम्मेदारों पर प्रकरण दर्ज किया जाएगा।"
-सुजीत तिवारी, टीआई
Published on:
27 Nov 2017 03:44 pm
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