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साइबर तहसील: घर बैठे मिलेगी रजिस्ट्री और नामांतरण की सुविधा, जिले में शुरू हुआ काम

नहीं लगाने पड़ेंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर, होगी आसानी, रोज हो रही मॉनीटरिंग

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साइबर तहसील: घर बैठे मिलेगी रजिस्ट्री और नामांतरण की सुविधा, जिले में शुरू हुआ काम

साइबर तहसील: घर बैठे मिलेगी रजिस्ट्री और नामांतरण की सुविधा, जिले में शुरू हुआ काम

देवास. जमीन की खरीदी-बिक्री के लिए अनिवार्य रजिस्ट्री समेत नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सरकार ने साइबर तहसील व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत जिले में देवास शहर व ग्रामीण को मिलाकर सभी तहसीलों में काम शुरू हो गया है। साइबर तहसील शुरू होने से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे। घर बैठे उन्हें रजिस्ट्री व नामांतरण की सुविधा मिल जाएगी।

इस प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जा रहा है। पक्षकार को ऑनलाइन आवेदन करना होगा जो तहसील कार्यालय में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में आवेदक को भी मैसेज के माध्यम से जानकारी मिल सकेगी। बिना विवाद की जमीन होने पर कम समय में नामांतरण होगा। इससे पक्षकारों का समय और धन की बचत होगी। जिले में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है और इसकी प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है।

प्रक्रिया लागू की, पोर्टल से जोड़ा

साइबर तहसील में पंजीयन से नामांतरण तक की सभी प्रकिया लागू कर दी गई है। साइबर तहसील को चार अलग-अलग प्लेटफार्मों जैसे संपदा पोर्टल, भूलेख पोर्टल, स्मार्ट एप्लीकेशन फाॅर रेवेन्यू एप्लीकेशन पोर्टल और रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल से जोड़ दिया गया है। साइबर तहसील में ऐसे सभी प्रकरणों का निराकरण होगा जो संपूर्ण खसरा से संबंधित हों, इसे विभाजित नहीं किया गया हो एवं ऐसी जमीन, जो किसी प्रकार से गिरवी या बंधक न रखी गई हो। पोर्टल पर पंजीयन करने और रजिस्ट्री के बाद रेवेन्यू पोर्टल पर स्वत: केस दर्ज हो जाएगा। इसके बाद साइबर तहसीलदार द्वारा जांच की जाएगी। सूचना के बाद इश्तेहार एवं पटवारी रिपोर्ट के लिए मेमो जारी किया जाएगा। इसके बाद आदेश पारित कर भू-अभिलेख को अपडेट किया जाएगा। दस दिन बाद दावा-आपत्ति प्राप्त नहीं होने पर ई-मेल एवं वाॅट्सअप से आदेश दिए जाएंगे। रजिस्ट्रार कार्यालय में विक्रय-पत्र (रजिस्ट्री) निष्पादन के दौरान आवेदक को आवश्यक प्रकिया शुल्क एवं निर्धारित प्रारूप में सामान्य जानकारी देनी होगी।

एसएमएस के माध्यम से जारी करेंगे नोटिस

ऐसे पंजीयन जिसमें संपूर्ण खसरा नंबर या संपूर्ण प्लॉट समाहित है और किसी भी खसरा या प्लॉट का कोई विभाजन नहीं है, तब ऐसे प्रकरण में पंजीकृत विक्रय विलेख (रजिस्ट्री) का स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से आर सीएमएस पोर्टल पर साइबर तहसील को भेजा जाएगा। साइबर तहसीलदार पंजीकृत दस्तावेज की राजस्व भू-अभिलेख से मिलान कर क्रेता, विक्रेता और सम्बंधित ग्राम के सभी निवासियों को एसएमएस के माध्यम से नोटिस जारी करेंगे। इस नोटिस में आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए लिंक भी होता है। साथ ही एक सार्वजनिक इश्तेहार तहसील के बोर्ड पर भी लगा रहता है। एक ऑनलाइन मेमो पटवारी प्रतिवेदन के लिए भी जारी होता है।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी राहत

सामान्य स्थिति में नामांतरण प्रक्रिया में एक माह की समय-सीमा तय है। इसके बावजूद नामांतरण के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता। लोकसेवा केंद्रों पर आवेदन के बाद बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ते हैं। वहीं ऑनलाइन आवेदन में राजस्व अधिकारी को स्वत: संज्ञान लेकर प्रकरण का त्वरित निराकरण करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया की सूचना पक्षकारों को उनके मोबाइल पर मिलेगी। किसानों का इसका प्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलेगा। रजिस्ट्री के बाद बिना आवेदन किए नामांतरण का प्रकरण दर्ज हो जाता है।

साइबर तहसील से यह होगा लाभ

-इस प्रक्रिया में क्रेता और विक्रेता को नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में उपस्थित होने या पेशी पर आने की जरूरत ही नहीं होगी।

-संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी होकर फेसलेस एवं पेपरलेस है।

-क्रेता-विक्रेता तथा ग्राम के सभी निवासियों को नोटिस एसएमएस से मिलता है।

-नोटिस आरसीएमएस पोर्टल पर भी पर भी दिखता है।

-ऑनलाइन आपत्ति दर्ज की जा सकती है।

-अंतिम आदेश की कॉपी ई-मेल या व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदक को मिलेगी।

-आदेश पारित होते ही भू-अभिलेखों (खसरे,नक़्शे) में स्वतः सुधार हो जाता है।

-आदेश एवं राजस्व अभिलेखों में अमल की प्रक्रिया सरकारी छुट्टियों को छोड़कर 15 दिनों में पूरी हो जाएगी।

-रियल टाइम में भू-अभिलेख अपडेट किए जाने की अनूठी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे पटवारी का हस्तक्षेप भी नहीं रहेगा।

-कम से कम समय में निराकरण होगा। पहले इन प्रक्रियाओं में औसत 60 दिन लग जाते थे। साइबर तहसील में औसत 15 दिनों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जायेगी।

साइबर तहसील को लेकर जिले में कार्य शुरू हो गया है। इसकी डेली मॉनीटरिंग की जा रही है। जिले में अच्छा काम चल रहा है। फिलहाल हमारे यहां कोई पेंडेंसी नहीं है।

-ऋषव गुप्ता, कलेक्टर