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लाड़ली लक्ष्मी योजना: बाल विवाह की शिकायत पर जांच में दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा, 12 हजार रुपए वसूले

-दसवीं की अंकसूची के अनुसार वर्ष 2004 में हुआ था जन्म, पात्रता 1 जनवरी 2006 के बाद वाली बालिकाओं की

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लाड़ली लक्ष्मी योजना: बाल विवाह की शिकायत पर जांच में दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा, 12 हजार रुपए वसूले

लाड़ली लक्ष्मी योजना: बाल विवाह की शिकायत पर जांच में दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा, 12 हजार रुपए वसूले

सत्येंद्रसिंह राठौर. देवास
लाड़लियों की पढ़ाई में सहयोग व 21 साल की उम्र होने पर एकमुश्त राशि देने के लिए 1 अप्रैल 2007 से शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना में फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना में 1 जनवरी 2006 व उसके बाद जन्म लेने वाली बालिकाओं को शामिल किया जाना था लेकिन शहर की एक ऐसी बालिका के परिजन ने लाभ ले लिया जिसका जन्म कक्षा दसवीं की अंकसूची के अनुसार वर्ष 2004 का है। पिछले दिनों जब इस बालिका के विवाह की तैयारी चल रही थी तो किसी ने महिला एवं बाल विकास विभाग में शिकायत कर दी कि नाबालिग का विवाह किया जा रहा है। इसके बाद टीम जांच के लिए जमनानगर पहुंची तो अंकसूची देखने पर मामले का खुलासा हुआ, इसके बाद परिवार से 12 हजार रुपए की रिकवरी की गई जो योजना के तहत बालिका को मिल चुके थे। उसे योजना के तहत अपात्र कर दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उक्त बालिका देवास के जमनानगर मेंं रहती है। उसे लाड़ली लक्ष्मी योजना के नियमानुसार कक्षा छठी में प्रवेश पर 2 हजार रुपए, नौंवी में प्रवेश पर 4 हजार रुपए व 11वीं में प्रवेश पर 6 हजार रुपए का लाभ मिल चुका था। बाल विवाह की जांच के दौरान 10वीं की अंकसूची में जन्म 2004 का दर्ज था जिसके आधार पर वह बालिग हो चुकी थी लेकिन इसके आधार पर उसे लाड़ली लक्ष्मी योजना में पात्रता नहीं थी। बालिका को दिए गए कुल 12 हजार रुपए परिवार से वसूल किए गए हैं। बताया जा रहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के पास बालिका जो जन्म प्रमाण पत्र है उसमें जन्म का वर्ष 2006 दर्ज है।
एक अन्य मामले में जन्म प्रमाण पत्र में वर्ष 2006, अंकसूची में 2005
जिले की टोंकखुर्द तहसील में भी एक बालिका की जन्मतिथि में अंतर का पता महिला एवं बाल विकास विभाग को पता चला है। योजना का लाभ लेने के लिए लगे जन्म प्रमाण पत्र में जन्म का वर्ष 2006 है जबकि स्कूल रिकॉर्ड में 2005 है। जानकारी मिलने पर महिला बाल विकास विभाग द्वारा स्कूल रिकॉर्ड में सुधार के लिए परिजनों को निर्देशित किया गया है। इस प्रकरण को होल्ड पर रखा गया है।
वर्जन
जमनानगर की बालिका के मामले में बाल विवाह की शिकायत की जांच के दौरान अपात्र होने का पता चला था। योजना के तहत उसे मिले लाभ के रुपयों की रिकवरी कर ली गई है, अन्य योजनाओं में भी इस तरह की गड़बड़ी का पता लगाने के लिए दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
-रेलम बघेल, डीपीओ महिला एवं बाल विकास विभाग देवास।

16 साल में 93927 बालिकाओं का पंजीयन
देवास जिले में लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू होने के बाद 2007 से लेकर अब तक कुल 93927 बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है। इनमें से 2016-17 से लेकर अब तक 18500 बालिकाओं को छात्रवृत्ति मिल चुकी है।
पहले 1.18, अब 1.43 लाख रुपए का लाभ
लाड़ली लक्ष्मी योजना में पहले कुल 1.18 लाख रुपए का लाभ दिया जाता था। कक्षा छठी में प्रवेश पर 2 हजार, नौंवी में प्रवेश पर 4 हजार, 11वीं व बारहवीं में प्रवेश पर 6-6 हजार रुपए दिए जाते थे। इसके बाद 21 साल की आयु होने पर (18 वर्ष के बाद विवाह करने पर) एक लाख रुपए देने का प्रावधान था। पिछले साल लाड़ली लक्ष्मी 2.0 योजना शुरू करते हुए कॉलेज में प्रवेश लेने पर व अंतिम वर्ष में 12500-12500 रुपए देने का प्रावधान कर दिया गया है, इस तरह अब इस योजना में कुल लाभ 1.43 लाख रुपए का मिलेगा।