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लक्ष्य योजना असेसमेंट: गर्भवतियों, माता व शिशु की देखभाल की व्यवस्थाएं बेहतर, 86 प्रतिशत अंक मिले

-जिला अस्पताल में गर्भवतियों, प्रसूताओं के लिए और संसाधन मिलने की उम्मीद, 14 नवंबर 2022 को केंद्रीय टीम ने किया था निरीक्षण

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लक्ष्य योजना असेसमेंट: गर्भवतियों, माता व शिशु की देखभाल की व्यवस्थाएं बेहतर, 80 प्रतिशत अंक मिले

लक्ष्य योजना असेसमेंट: गर्भवतियों, माता व शिशु की देखभाल की व्यवस्थाएं बेहतर, 80 प्रतिशत अंक मिले

देवास. प्रसव के पहले से लेकर बाद तक की स्थिति के लिए जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं व व्यवस्थाओं को केंद्रीय टीम के असेसमेंट में बेहतर पाया गया है। पिछले साल हुए असेसमेंट की रिपोर्ट के आधार पर 86 प्रतिशत अंक मिले हैं, इसके बाद जहां पुरस्कार मिलेगा वहीं मेटरनिटी वार्ड, लेबर रूम आदि के लिए सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। टीम ने पिछले साल 14 नवंबर को असेसमेंट किया था जिसमें कर्नाटक से डॉॅ. कविता व दिल्ली से डॉ. मिनीमोल शामिल थीं। मातृ-शिशु सुरक्षा को लेकर व गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 8 बिंदु तय किए गए थे, उसी आधार पर असेसमेंट करके अंक दिए गए हैं। 7 घंटे के निरीक्षण में टीम ने लेबर रूम, पीएनसी, एएनसी वार्ड को देखा था। गर्भवतियों, प्रसूताओं सहित उनके परिजनों से चर्चा की थी। इसके बाद नर्सिंग स्टॉफ, आया, बाइयों आदि के इंटरव्यू लिए थे।
24 घंटे में होते हैं 30-35 प्रसव
लेबर रूम प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर सुधा नायर ने बताया 24 घंटे में औसतन 35 प्रसव जिला अस्पताल में होते हैं। रैफर करने की स्थिति कभी-कभार ही बनती है और अधिकांश प्रसव सामान्य होते हैं। वर्तमान में अलग-अलग वार्ड में करीब 120 बेड उपलब्ध हैं, देवास जिले के अलावा आसपास के जिलों की महिलाएं भी प्रसव के लिए यहां आती हैं।
वर्जन
डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ व अन्य के सहयोग से लक्ष्य योजना के तहत सफलता मिली है। लेबर रूम, मेटरनिटी वार्ड आदि में और संसाधन व व्यवस्थाएं बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले हिस्से में बन रहे भवन के बाद गर्भवतियों व प्रसूताओं के लिए बेड की संख्या बढक़र करीब दोगुना हो जाएगी।
-डॉ. अजय पटेल, आरएमओ जिला अस्पताल।