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पत्रिका एक्सक्लूसिव
जाहिद खान
देवास.बड़े से बड़े प्रायवेट स्कूलों में गरीब बच्चे भी अच्छी शिक्षा ले सके, इसके लिए आरटीई के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बच्चों का प्रायवेट स्कूल में प्रवेश हो इसके लिए प्रक्रिया शुरू की गईथी। प्रत्येक स्कूल में २५ फीसदी गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है और इन बच्चों की फीस शासन के द्वारा स्कूल में जमा की जा रही है। स्कूलों में फीस पहुंचाने की प्रक्रिया ऑफ लाइन थी तब तक सबकुछ ठिक चल रहा था, किंतु वर्ष २०१५-१६ में शासन के आदेश पर बच्चों की ऑनलाइन जानकारी मंगाकर फीस स्कूलों के खातों में डालने की व्यवस्था शुरू की गई। इस नई व्यवस्था से गरीब बच्चों के परिजनों की परेशानियों दोगुना हो गईहै।
ऑनलाइन प्रक्रिया में स्कूल में पढऩे वाले बच्चों की जानकारी समग्र आईडी, आधार कार्ड व आरटीईमें प्रवेश को दौरान दी जानकारी एक समान होना अनिवार्य है। जब ऑनलाइन यह जानकारी भोपाल में देखी गई तो किसी बच्चे के नाम में गलती, सरनेम में गलती, छोटी-बड़ी मात्राओं की गलती, पता गलत, पिता के नाम में गलती सहित अन्य गलतियां होने से जिले के १५ हजार प्रायवेट स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे और पालकगण परेशान हो रहे हैं।अब स्थिति यह आ गई है कि स्कूल संचालक इन गरीब बच्चों की फीस खाते में नहीं आने पर परिजनों से वसूल करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बच्चों को प्रतिदिन प्रताडि़त कर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। बच्चे स्कूल जाने से मना कर रहे हैं, वहीं परिजन भी नामों में सुधार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
आधार केंद्र बंद होने से समस्या बढ़ी
शहर से लेकर जिले भर में आधार केंद्रों को बंद किए जाने से बच्चों के नामों में सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। जिले भर में मात्र १४ आधार केंद्रों पर आधार कार्ड में सुधार कार्य चल रहा है, जो जनसंया के मान से काफी कम है। जहां भी आधार केंद्र हैं, वहां इतनी भीड़ उमड़ रही हैकि १५ दिन में नंबर आने के टोकन बांटे जा रहे हैं। इस समस्या के निराकरण के लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने पिछले दिनों कलेक्टर को प्रबंधक ई-गवर्नेस के नाम पर पत्र लिख कर आधार केंद्रों की संया बढ़ाने की मांग की है। स्कूल संचालकों का कहना है कि बच्चों के नाम में आ रही गलतियों की वजह से समय पर शासन की ओर से फीस नहीं मिल रही है। फीस नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ष २०१५-१६ के बाद अब २०१६-१७ की फीस भी पेडिंग हो गईहै।
आरटीई में ३४ हजार बच्चे स्कूल में पढ़ रहे
राज्य शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार शहर से लेकर जिले भर के प्रायवेट स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की संया करीब ३४ हजार है। इनमें से १५ हजार बच्चों की गलत जानकारियां होने से फीस अटकी हुई हैं। सत्र २०१६-१७ के लिए १५ करोड़ रुपए की मांग की है, जो प्रायवेट स्कूलों में वितरित करना है, किंतु आधार अपडेशन व आईडी में गलतियां होने से मामला अटका हुआ है। देवास जिला ही नहीं पूरे प्रदेश में बच्चों की जानकारियों में परेशानी आ रही हैं।राज्य शिक्षा केंद्र से समस्या वाले बच्चों की जानकारी भोपाल भेज दी गई है। आने वाले दिनों में इनमें सुधार के लिए निर्देश जारी होने पर ऑनलाइन गलतियों में सुधार कार्य होना है।
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अल्फेज के नाम की आईडी बन गईश्रीकांत की
विद्यार्थियों के नामों में गलतियां होने के साथ ही कुछ केस में समग्र आईडी भी गलत अपलोड कर दी गई है। शहर के नौसराबाद कॉलोनी में रहने वाले छात्र अल्फेज पिता खालिक शेख का समग्र आईडी नंबर १७७४१९०२९ है, जिसमें सभी जानकारियां सही हैं, किंतु वर्ष२०१५-१६ में अल्फेज की आईडी नंबर १७७९१९०२३ गलती से दर्ज हो गई और संबंधित स्कूल में फीस का भुगतान हो चुका है। सत्र २०१६-१७ में फिर से आईडी नंबर १७७९१९०२३ से जानकारी भोपाल भेजी गई तो उसे रिजेक्ट कर दिया गया। इस नंबर पर ग्राम अमरपुर, जनपद पंचायत मानपूर जिला उमरिया के श्रीकांत त्रिपाठी का नाम आ रहा है। यह समस्या पालक के लिए परेशानी का सबब बन गई, क्योंकि स्कूल संचालक आईडी नंबर १७७९१९०२३ इसी आईडी नंबर को मांग रहे हैं, जिसमें अल्फेज की जगह श्रीकांत का नाम आ रहा है। आईडी नहीं देने पर स्कूल प्राचार्य पालक से फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। इसको लेकर पालक खालिक शेख ने बीआरसी में शिकायती आवेदन देकर गलती सुधार की मांग की है।
आधार अपडेशन एवं आईडी में गलतियों के कारण समस्त निजी स्कूलों के बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति करने में समय लग रहा है। आज दिनांक तक डीपीसी स्तर पर किसी भी शाला का प्रपोजल प्राप्त नहीं हो सका है। यह काम तत्पर्रता से करने के निर्देश संबंधितों को दिए गए हैं।
विनोदसिंह सिसौदिया, एपीसी जिला शिक्षा केंद्र देवास।
Published on:
17 Mar 2018 11:50 am
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