8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

महिला डॉक्टर ने बोल दी ऐसी बात, आफत में आ गई प्रसूता की जान

वाहन नहीं है, मैं नहीं आ सकती, प्रायवेट हॉस्पिटल में हुआ प्रसव

3 min read
Google source verification

देवास

image

Amit Mandloi

Aug 26, 2018

dewas

dewas

देवास. जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की खामियाजा सबसे ज्यादा प्रसूताओं को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार सुबह भाई अपनी बहन को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर आया था। सुबह से शाम तक मौजूद सिस्टर व डॉक्टर उन्हे दिलाशा देते रहे कि मेडम आएगी तो सीजर हो जाएगी। रात करीब ९ बजे मरीज की हालत खराब हुई तो अटेंडर ने डॉ. पुष्पा पवैया को फोन लगाया, जिन्होंने वाहन नहीं होने पर अस्पताल में आने में असमर्थता दिखाई। परिजन मोबाइल पर गुहार लगाते रहे, किंतु मेडम पवैया नहीं आई तो परिजन प्रसूता को लेकर प्रायवेट हॉस्पिटल पहुंचे, जहां पर तीस मिनट में सीजर ऑपरेशन हो गया।

डॉक्टर की लापरवाही की शिकायत शनिवार को शिकायतकर्ता शोहेल पिता शहंशाह निवासी जोशीपुरा ने जिला अस्पताल में विकलांग पुनर्वास केंद्र के नवीन भवन निर्माण के भूमिपूजन के दौरान आए केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गेहलोत, विधायक गायत्रीराजे पवार, महापौर सुभाष शर्मा के सामने कलेक्टर श्रीकांत पांडे को आवेदन दिया। आवेदन में उल्लेख किया कि जिला अस्पताल में शुक्रवार को मेरी बहन नुरजहां बी की डिलेवरी के लिए सुबह ९ बजे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था। बहन को ज्यादा तकलीफ होने मौजूद स्टॉफ से सीजर के लिए कहा, तो स्टॉफ ने कहा कि सीजर ऑपरेशन मेडम पुष्पा पवैया करेंगी, जिनका आने का समय शाम 6 बजे का है।

रात 9 बजे तक मेडम के नहीं आने पर उन्हे फोन लगाया तो कहना था कि मेरे पास गाड़ी नहीं है, इसलिए मैं अस्पताल में नहीं आ सकती। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने गाड़ी भेजने के लिए ऊपर कॉले भी कर दिया था, किंतु गाड़ी उपलब्ध नहीं होने पर मेडम नहीं आई। इस पर कलेक्टर ने मौके पर ही उपस्थित सीएमएचओ डॉक्टर एसके सरल को जांच करने के निर्देश दिए।

प्रायवेट हॉस्पिटल लेकर भागे

पीडि़त शोहेल ने बताया, रात 9 बजे बाद बहन की हालत बिगडऩे लगी तो तत्काल लेकर हम उसे डॉ. चारू तिवारी के श्रीराम हॉस्पिटल में ले गए, जहां पर आधे घंटे में सीजर हो गया। अगर हम कुछ देर ओर कर देते तो बच्चा व उसकी मां को बचाना मुश्किल हो जाता। आवेदक ने लापरवाही करने वाले डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। परिजनों का आरोप था कि जिला अस्पताल में शर्मा नामक मेडम ने सीजर करने के एवज में २ हजार रुपए की खुली मांग की थी। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा अवैध वसूली का खेल प्रसूता वार्ड में होता है। यहां पर गरीब प्रसव के लिए प्रसूताओं को लाते हैं, जिनसे हजारों रुपए की पगार पाने वाले डॉक्टर राशि की मांग करते हैं। राशि नहीं देने पर काफी देर तक मरीज को परेशान किया जाता है।

वाहन नहीं होगा तो अस्पताल नहीं आएगी

परिजनों का कहना था कि मेडम ने साफ कह दिया था कि मुझे लेने के लिए वाहन नहीं आया, मैं नहीं आउंगी। मेडम का इस तरह का रवैया मरीजों की जान भी ले सकता है। मेडम को लाने के लिए वाहन अस्पताल प्रबंधन के पास उपलब्ध नहीं हो रहा था तो वह स्वयं के वाहन से आ सकती थी। प्रसूता के परिजनों ने वाहन का इंतजाम कर लेकर आने का कहा था, जिसके बाद भी डॉ. ने आने का मना कर दिया था।

रात में डॉ. पवैया की ड्यूटी थी, उन्हे अपने वाहन से आ जाना चाहिए था। मैंने जांच के लिए तीन डॉक्टरों की टीम गठित की है, जो तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
डॉ. एसके सरल, सीएमएचओ देवास।

मैं रात 7.30 बजे से ड्यूटी डॉक्टर पलक शर्मा को कॉल कर रही थी की गाड़ी भेज दो। अस्पताल में क्या हुआ इसका मुझे पता नहीं है। कॉल करने पर कॉल गाड़ी से ही अस्पताल आते हैं। मरीज ज्यादा गंभीर नहीं थी, आसानी से सीजर हो जाता।
डॉ. पुष्पा पवैया, जिला अस्पताल देवास।