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संविधान द्वारा प्रदत्त मानवाधिकार नागरिक की गरिमा और गौरव की गारंटी है: शर्मा

मानव अधिकार दिवस पर जय हिन्द सखी मंडल ने किया आयोजन

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संविधान द्वारा प्रदत्त मानवाधिकार नागरिक की गरिमा और गौरव की गारंटी है: शर्मा

संविधान द्वारा प्रदत्त मानवाधिकार नागरिक की गरिमा और गौरव की गारंटी है: शर्मा

देवास. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पूरे विश्व के लिए कुछ मूलभूत अधिकारों की घोषणा की गई है। इन्हें ही मानवाधिकार कहतेे हैं। विश्व के प्रत्येक सदस्य देश द्वारा इन अधिकारों को मान्य करने और मान्य करवाने के लिए अपने अपने संविधान में कानून का रूप दिया गया है। इसी क्रम में हमारे देश के संविधान में मौलिक अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए समय समय पर शासन द्वारा अनेकों प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए हमारे देश में एक मानव अधिकार आयोग का गठन भी किया गया है। जय हिन्द सखी मंडल द्वारा महर्षि पतंजली योग परिसर में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक शिक्षाविद एवं शासकीय शिक्षा महाविद्यालय में पदस्थ वर्षा शर्मा ने उक्त विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में शिक्षा का अधिकार लागू है। कभी विश्व गुरु रहा भारत मध्य युगीन बर्बर आक्रांताओं केे आक्रमणों के कारण शिक्षा के क्षेत्र में दयनीय स्थिति में पहुंच चुका था लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही है। शिक्षा की स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। इस समय शैक्षिक स्वर्ण युग में प्रवेश के लिए शिक्षा का अधिकार मील का पत्थर है। इसकेे तहत गांव, मजरेे और टोलों तक शिक्षा का प्रकाश फैल चुका है। सुदूर वनवासी अंचलों में प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करना अब सपना नहीं है। अब तो प्रारंभिक शिक्षा नि:शुल्क प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। अब अपनी योग्यतानुसार अपना जीवन यापन करना हमारा अधिकार है। कोई इससे वंचित नहीं कर सकता है। प्रत्येक देशवासी को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।

कोई गुलाम नहीं बना सकता

शर्मा ने कहा कि अब कोई हमें गुलाम नहीं बना सकता है। कोई हमसे बंधुआ मजदूरी नहीं करवा सकता है। इसी प्रकार रंग, नस्ल, भाषा, समाज, जाति और धर्म के आधार पर अब कोइ भेदभाव नहीं कर सकता है। ऊंच-नीच, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब आदि अनेक विषमताएं अब विलुप्त हो चुकी हैं। समानता के अधिकार ने इन सब बुराइयों को समाप्त कर दिया है। अब कोई हमें डराकर, धमकाकर या अन्य प्रकार से हमारा धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है। अब हम अपने धर्म में स्थिर रहकर अपने धार्मिक अनुष्ठानों को निर्विघ्न संपन्न कर सकते हैं। क्योंकि अब हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।

इन्होंने भी रखे विचार

उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त मानवाधिकार मनुष्य की गरिमा और गौरव की गारंटी है। कार्यक्रम में सखी मंडल की शबाना शाह और जाह्नवी कुशवाह ने भी मानव अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में अंकिता परसाई, वैशाली शर्मा, रानू गिरि, वर्षा अंजना, तनु परमार, रिया चौहान, यामिनी मोदी, प्रेरणा कुमरे, खुशी अग्रवाल, शिवानी पंडित, लक्ष्मी बाली, तनु चुलीवाल, हीना वाघमारे, संगीता पारस सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम की भूमिका तनुश्री विश्वकर्मा ने प्रस्तुत की। अतिथि स्वागत मानसी ठाकुर ने किया। परिचय खुशी परिहार ने दिया। संचालन स्नेहा ठाकुर ने किया तथा आभार किरण कुमावत ने माना।