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video-जिस धरोहर के साथ देवास का इतिहास जुड़ा उसे सहेजने आगे आए लोग

पत्रिका अमृतं जलम के तहत उज्जैन रोड स्थित रानीबाग बावड़ी की सफाई की गई

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देवास

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mayur vyas

Jun 10, 2019

dewas

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- अभियान से जुड़े लोगों ने कहा ऐसे अभियान से नई पीढ़ी होगी जागरूक
देवास. प्राकृतिक जल स्त्रोतों को सहेजने की आज बेहद जरूरत है। नर्मदा जल पर शहर की निर्भरता जब से बढ़ी है, लोग शहर के प्राचीन जल स्त्रोतों को भूलते जा रहे है। नईपीढ़ी को तो कई पुराने जल स्त्रोतों का ठीक से इतिहास भी नहीं पता है, ये प्राकृतिक जल स्त्रोत कई पीढिय़ों का सफर कर आज भी हमारे सामने मौजूद तो है लेकिन ये अब खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है, जबकि किसी समय शहर को आबाद करने में इन्हीं का मुय योगदान था। कभी शहर की पहचान रही बावडिय़ों की चिंता लोगों ने पत्रिका के साथ साझा की, इसी चिंता को अपने जेहन में साथ लेकर रविवार को पत्रिका के महाअभियान अमृतं जलम का बड़ी संया में हिस्सा बनने के लिए लोग आगे आए।
रविवार को नगर निगम के विशेष सहयोग के साथ पत्रिका ने उज्जैन रोड पर स्थित शहर की रियासतकालीन बावडिय़ों में से एक रानीबाग बावड़ी की सफाई का अभियान चलाया था। इस रियासतकालीन बावड़ी से कभी शहर की आबादी अपनी प्यास बुझाती थी, कालांतर में अन्य बावडिय़ों की तरह इसकी भी अपेक्षा होने लगी व शहर गंभीर जल संकट में फंसता गया। लापरवाही की हद तो ये भी रही कि बावड़ी में नवनिर्माण के नाम पर पानी के आव का रास्ता ही कई जगह से बंद कर दिया गया था। रविवार को पत्रिका ने इसे मुहिम के रूप में लिया तो शहर के लोगों को भी अच्छा लगा कि एक प्राचीन जल स्त्रोत को फिर से खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। इस भागीरथी प्रयास में करीब ढाई घंटे लोगों ने जमकर श्रमदान किया। लोगों की मेहनत व नगर निगम का सहयोग रंग लाया व करीब ढाई घंटे बाद बावड़ी के घाट सफाई के बाद अपनी रंगत बिखेर रहे थे। एक बार तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये वो ही रानीबाग बावड़ी का घाट है जो कुछ घंटों पहले एक गंदे कूड़ा स्थल के रूप में नजर आ रहा था। लोगों की मेहनत का नतीजा सामने नजर आया तो निगम के अफसर भी उत्साह में आ गए व इस बावड़ी के संपूर्ण कायाकल्प की बड़ी योजना भी मौके पर ही तैयार की गई। नगर निगम अगले रविवार को अब इस प्राचीन बावड़ी के पानी की पूरी तरह सफाई कराएगा, इसके लिए निगम विशेष टीम बुलाएगा, जो पूरे काम को बावड़ी के अंदर उतरकर पूरा करेगी।
ढाई दशक पहले ट्रेन से आया पानी सहेजा गया
देवास की पहचान एक समय विशेष जलसंकट वाले क्षेत्र के रूप में हो गई थी। इस पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सूर्खी तब मिली थी जब शहर के अंदर लोगों की प्यास बुझाने के लिए ट्रेन से पानी बुलाया गया था। करीब ढाई दशक पूर्व जब ट्रेन से देवास पानी बुलाया गया था तो इस पानी को रानी बाग की बावड़ी में ही स्टोरेज किया गया था। यहां पानी स्टोरेज करने के बाद पूरे शहर को टैंकरों से जलप्रदाय किया जाता था। उस समय रानीबाग की बावड़ी को भी विशेष पहचान मिली थी। हालाकि बाद के समय में भी रानीबाग की बावड़ी को सहेजने के लिए कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई। आज की स्थिति में अगर इस बावड़ी को सहेज लिया जाए तो शहर के एक क्षेत्र में पानी की आपूर्ति यहां से हो सकती है साथ ही निगम का भार भी कम हो जाएगा। अभी नर्मदा का पानी खरीदने में निगम को करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ रहे है, रानी बाग जैसे अन्य प्राकृतिक स्त्रोतों को सहेजकर निगम अपना कुछ पैसा बचा सकता है।
पत्रिका ने आगाज किया शहरवासी आगे बढ़ाए
अमृतं जलम जैसे अभियान के सहारे पत्रिका हर साल अपने प्राकृतिक जल स्त्रोतों के प्रति शहरवासियों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है। अगर रानी बावड़ी जैसे अन्य जल स्त्रोतों को आज भी सहेज लिया जाए तो भविष्य के बड़े संकट से हम बच जाएंगे।
बाक्स में.........
500 साल पुरानी है बावड़ी
शहर की प्यास बुझाने के लिए रानीबाग की बावड़ी कभी प्रमुख जल स्त्रोत की तरह काम करती थी। मई-जून में भी इसमें पर्याप्त पानी रहता था। इतिहासकार जीवनसिंह ठाकुर के अनुसार रानीबाग की बावड़ी करीब 500 साल पुरानी है। इस बावड़ी से किसी समय शहर की 40 हजार की आबादी को पानी मिलता था। शुध्द पानी के लिए ये दूर-दूर तक वियात थी।