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हड़ताल खत्म होने के बाद भी संजीवनी कर्मी अब तक नहीं लौटे काम पर, मरीजों की जान पर मंडरा रहा खतरा

संजीवनीकमियोंं ने हड़ताल तो समाप्त कर दिया है, लेकिन अब तक वे ड्यूटी ज्वाइन नहीं किए हैं। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

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धमतरी

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Deepak Sahu

Sep 08, 2018

cg news

हड़ताल खत्म होने के बाद भी संजीवनी कर्मी अब तक नहीं लौटे काम पर, मरीजों की जान पर मंडरा रहा खतरा

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में संजीवनीकमियोंं ने हड़ताल तो समाप्त कर दिया है, लेकिन अब तक वे ड्यूटी ज्वाइन नहीं किए हैं। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। उधर शासन व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए अनट्रेंड ईएमटी से सेवा ले रहा है, जिसके चलते मरीजों की जान पर खतरा मंडराने लगा है।

उल्लेखनीय है कि धमतरी जिलेवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन से 7 संजीवनी वाहन और 11 महतारी एक्सप्रेस स्वास्थ्य विभाग को प्रदान किया गया है। इसके तहत 84 कर्मियोंं की भी ड्यूटी लगाई गई है, जो जीवीके कंपनी के अंडर में रहकर काम कर है। पिछले कुछ माह से वे वेतन विसंगति की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं, हालांकि शासन की पहल पर संजीवनीकर्मियोंं ने हड़ताल तो खत्म कर दिया है, लेकिन काम पर वापस नहीं लौटे हैं। ऐसे मेंं स्वास्थ्य विभाग पर दबाव काफी बढ़ गया है। लगातार मिल रही शिकायत के बाद विभाग ने शासकीय कर्मियों की ड्यूटी तो लगा दिया है, लेकिन वे अनटें्रड हैं।

सूत्रों की मानेंं तो जिले के कई एंबुलेस में अनटें्रड ईएमटी है, जिन्हें संजीवनी वाहन में लगे उपकरणोंं की ठीक तरह से जानकारी नहीं है। ऐसे में अस्पताल पहुंचते तक मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और उन्हें पूरे रास्ते भर परेशान होना पड़ता हैै।

कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मोहनीश सिन्हा का कहना है कि कंपनी कर्मचारियोंं से कभी भी हड़ताल न करने की शपथ मांग रही है। यदि हम शर्त मानकर ड्यूटी ज्वाईन कर लेते हैं, तो मांगें पूरी नहीं होगी। ऐसे में हम फिर कोई आवाज नहीं उठा सकेंगे।

गोरेगांव निवासी अमृतलाल ने बताया कि पिछले दिनों अचानक तबीयत खराब होने पर उन्होंने इमरजेंंसी सेवा के लिए संजीवनी को डायल किया, वाहन तो पहुंचा, लेकिन त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाई।

सांकरा में एक बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसकी मां अहिल्या बाई ने संजीवनी 108 में डायल किया, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा, मजबूरी मेंं उसे निजी वाहन की सेवा लेना पड़ा।

सीएमएचओ, डॉ डीके तुर्रे ने बताया जिले मेंं संजीवनी सेवा को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। प्रशिक्षित ईएमटी से ही सेवा लिया जा रहा है।