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धमतरी में मलेरिया का प्रकोप, अब तक चार लोगों की मौत, 228 मामले आए सामने

मलेरिया के नाम पर धमतरी जिला काफी संवेदनशील हो गया है। तीन साल से लगातार इसके मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

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Malaria disease will end

धमतरी. मलेरिया के नाम पर धमतरी जिला काफी संवेदनशील हो गया है। तीन साल से लगातार इसके मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। हर साल मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लाखों का बजट आता है, लेकिन डीडीटी छिड़काव में कोताही के चलते मलेरिया के मच्छर कम नहीं हो रहे हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब है।

उल्लेखनीय है कि पहले मलेरिया उन्मूलन के लिए फील्ड वर्कर तैनात थे, लेकिन अब इन्हें हटा दिया गया है, जिसके चलते मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम पर बुरा असर पड़ा है। पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो २ लाख ६५ हजार ५७६ लोगों का खून परीक्षण किया गया, जिसमेंं से 3 हजार 155 लोग मलेरिया पॉजिटिव मिले। इस साल भी मलेरिया का कहर जारी है। आठ महीने यहां 6२८ मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं।

नगरी में स्थिति अनकंट्रोल
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस साल अब तक 58 हजार लोगों के ब्लड की जांच की गई, जिसमें जिला अस्पताल में मलेरिया के 27 मरीज मिले हैं। इसके अलावा नगरी ब्लाक में 399, मगरलोड में 123, गुजरा में 65 तथा कुरूद ब्लाक में मलेरिया के 14 मरीज मिले हैं। मलेरिया को लेकर जिले में सर्वाधिक संवेदनशील नगरी क्षेत्र है। यहां अकलाडोंगरी, सांकरा, बेलरगांव, सिंगपुर में मरीजों की संख्या काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त धमतरी डूबान और मगरलोड का सिंगपुर क्षेत्र में इसकी चपेट में है।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले 226 गांव मलेरिया से इफेक्टेड हैं। नगरी में 150, मगरलोड में 43, धमतरी में 33 गांवों में मलेरिया का प्रकोप है। मच्छरों के आतंक के चलते वनग्राम रतावा, रिसगांव, खल्लारी, कसपुर, तिर्रा, मोंगरागहन, अरौद, मारागांव, भोभलाबाहरा, मोहेरा, मड़वापथरा, खड़ादाह, निरई आदि गांवों में लोगों को रात काटना मुश्किल हो गया है।

&मलेरिया की रोकथाम के लिए भरसक प्रयास किया जा रहा है। हाई रिस्क क्षेत्रों में डीडीटी का छिड़काव कर लोगों की ब्लड स्लाइड भी बनाई जा रही है, ताकि मरीजों का समय पर उपचार हो सके। डॉ डीके तुर्रे, सीएमओएच

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