
मिट्टी के शिल्पकारों की जिंदगी में छाया अंधियारा, माटीकला बोर्ड नहीं ले रहा सुध
धमतरी. छत्तीसगढ़ में विभागीय अधिकारियोंं की उदासीनता के कारण जिले के करीब साढ़े 6 हजार कुम्हारों बेबसी की जिंदगी बिताना पड़ रहा है, उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे कुम्हारों की स्थिति दयनीय हो गई है। माटी कला बोर्ड भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिसके चलते उनमें रोष व्याप्त है।
बता दे कि कुम्हारोंं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा जिले में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना संचालित किया जा रहा है। इसके तहत कुम्हारोंं को नि:शुल्क इलेक्ट्रानिक चाक, बर्तन और मूर्ति समेत अन्य चीजें बनाने के लिए मिट्टी, पैरा समेत कई संसाधन उपलब्ध कराना है। लेकिन अधिकारियोंं की उदासीनता के चलते जिले मेंं यह योजना दम तोड़ रही है।शनिवार को पत्रिका ने कुम्हार पारा का जायजा लिया। करीब ढाई हजार की आबादी वाले इस वार्ड में कुम्हारोंं को जीवनयापन करने के लिए मशक्त करना पड़ रहा है।
जब यह प्रतिनिधि पहुंचा, तो लिलेेश्वर और प्रहलाद कुंभकार विघ्नहर्ता की प्रतिमा को आकार दे रहे थे। उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ शासन के 14 साल के कार्यकाल में कुम्हारोंं को किसी भी तरह से शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिला है और न ही कोई अधिकारी आज तक इस वार्ड में आया है। बताया गया है कि वर्तमान मेंं उन्हें मिट्टी के बर्तन समेत प्रतिमा बनाने के लिए बाहर से मिट्टी मंगाना पड़ रहा है। 1 टे्रक्टर मिट्टी को 14 सौ रूपए में खरीदकर वे मिट्टी के बर्तन बनाकर अपना जीवन चला रहे हैं।
सूत्रों की मानेंं तो स्वर्ण जयंती रोजगार योजना के तहत 2 हजार मेंं से मात्र 24 कुंभकारों को ही इलेक्ट्रानिक चाक का वितरण किया गया है।अन्य लोगों को इलेक्ट्रानिक चाक मिला और न ही इस योजना का लाभ।
सीईओ जिपं रितेश अग्रवाल ने बताया कि योजना का लाभ लेने किसी ने भी आवेदन नहीं किया है। आवेदन आने पर इसका लाभ दिलाया जाएगा।
मूर्तिकार खेमराज कुंभकार ने बताया कि पूर्व में जिला प्रशासन ने 2 हजार में से 25 लोगोंं को ही इलेक्ट्रानिक चाक प्रदान किया था। शासकीय योजनाओं के बारे में 90 फीसदी लोगोंं को जानकारी नहीं है। ऐेसे में कुंभकारोंं की स्थिति दयनीय हो गई है।
उधर लगातार मिल रही शिकायत के बाद राज्य शासन ने माटी कला बोर्ड का गठन किया है। इसके तहत कुंभकारों को परंपरागत व्यवसाय को बढ़ावा देने और सामान खरीदने के लिए 1 लाख रूपए तक लोन देने का प्रावधान है। इसके तहत जिले के करीब 15 फीसदी कुंभकारों का कार्ड तो बना, लेकिन इसका लाभ नहीं मिला। और तो और उन्हेंं शासकीय योजनाओं के बारे मेंं भी जानकारी नहीं है।
Published on:
19 Aug 2018 06:03 pm
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