
बारिश के बाद नहीं रुके सैलानियों के कदम, गंगरेल बांध में उमड़ी पर्यटकों की भीड़
धमतरी. Dhamtari Tourist Spot: अंचल में झमाझम बारिश का दौर थमने के बाद गंगरेल बांध (Gangrel Dam) में सैलानियों की बहार आ गई। दूरदराज से आए सैलानी यहां बांध के पानी में अठखेलियां करते नजर आए। बांध में वाटर स्पोर्ट्स का भी आनंद लिया। भारी बारिश के बाद रविवार को मौसम काफी सुहाना रहा। इसके चलते गंगरेल बांध में सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
धमतरी के साथ ही राजधानी रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, महासमुंद क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में सैलानी गंगरेल बांध पहुंचकर यहां का सुंदर नजारे को करीब से निहारा। रविवार की स्थिति में &2.150 टीएमसी क्षमता वाले गंगरेल बांध में अभी 24.1&6 टीएमसी पानी संग्रहित हैं। इसमें उपयोगी पानी 19.065 टीएमसी हैं तथा बांध में अभी भी 4 हजार 609 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। यहां 70 फीसदी पानी भर जाने के बाद गंगरेल बांध का सौंदर्यी काफी बढ़ गया हैं। सुबह से ही लोग यहां सैर सपाटे के लिए पहुंचना शुरू हो गए थे।
वनदेवी मां अंगारमोती का दर्शन-पूजन करने के बाद लोगों ने बांध में बोटिंग का जमकर लुत्फ उठाया। अन्य दिनों की अपेक्षा रविवार को यहां सर्वाधिक भीड़ देखी गई है। बच्चों से लेकर युवतियां, महिलाएं और बड़े-बुजुर्गों ने यहां क्रूज जहाज के अलावा क्वीन ऑफ गंगरेल, एक्वा जार्बिंग बोट, फ्लाई बोट, स्पीड बोट, लग्जरी बोट आदि विविध प्रकार के बोट में बैठकर पर्यटन का आनंद लिया। क्रूज जहाज के जरिए सैलानियों को बांध के टापू क्षेत्र का भी भ्रमण कराया गया।
कांकेर से आए सैलानी राजेश जैन, अर्पित अग्रवाल, कन्हैया लाल अग्रवाल का कहना है कि छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में पर्यटन के लिए गए, लेकिन धमतरी के गंगरेल बांध की बात कही कुछ और है। मध्य भारत में यह सबसे सुंदर पर्यटन क्षेत्र बनकर उभरा है। बांध में अथाह पानी के बीच बोटिंग करने में जो आनंद आया, उसे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। मालती बिंझेकर, कविता साहू, रजनी जैन ने कहा कि गंगरेल बांध को पर्यटन सर्किट में जोड़कर जिस तरह से यहां पर्यटन विकास हुआ हैं, वह काफी सराहनीय है। शासन को यहां बोर्टिंग पाइंट के रेट में और राहत दिया जाए तो सैलानियों को काफी राहत मिलेगी।
सैलानी मंजू छाबड़ा, रीतिका पवार ने कहा कि गंगरेल बांध का सौदर्य लोगों को बरबस लुभा रहा हैं। सरकार को यहां सैलानियों के लिए और सुविधाएं देना चाहिए। इसमें स्थानीय स्तर पर महिला समूह का भी सहायता लिया जा सकता है। सैलानियों ने बांध में बोटिंग का मजा लेने के बाद मानव वन का भी सैर किया। यहां मानव की आकृति बनाकर उसमें विविध बीमारियों में उपयोग में आने वाले औषधीय गुणों वाली जड़ी-बुटियों, फूल पौधों का रोपण किया गया। इसे लोगों ने करीब से निहारा। पश्चात बांध में पानी के नजदीक बने मचान में भी चढ़कर प्राकृतिक सौंदर्य को भी देखा।
दिखे सेल्फी लेते हुए
सैर सपाटे के लिए पहुंचे बच्चों की टोली के साथ महिलाओं की टोली भी पानी में अठखेलियां करते नजर आए। कई सैलानियों ने इस पल को यादगार बनाने के लिए सेल्फी लेने में मस्त दिखे, तो कुछ ग्रुप फोटोग्राफी में व्यस्त रहे। यही नहीं अनेक टोलियां अपने घरों से लाए विशेष पकवान को भी मिल-बांटकर खाने में व्यस्त नजर आए।
संस्कृति की झलक
पर्यटन मंडल की ओर से जब से गंगरेल बांध में इको एथनिक डेवलपमेंट मॉडल पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति को उकेरता हुए ट्राइबल सर्किट हाउस का निर्माण किया गया है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी पहुंच रहे है। बताया गया है कि यह प्रदेश में अपने तरह का पहला सर्किट हाउस है। इसमें कलाकारों ने आदिवासी संस्कृति को जीवंत रूप से उकेरा है। जो छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति का अद्भूत तरीके से बखान कर रहा है।
(अब्दुल रज्जाक की रिपोर्ट)
Updated on:
20 Sept 2021 09:47 pm
Published on:
20 Sept 2021 09:38 pm
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